Narendranagar Immersed in Devotion as Jind Kanwar Seva Sangh Hosts 30th Annual Shiva Bhandara
- 30 वर्षों से शिवभक्तों की सेवा में समर्पित जींद कांवड़ सेवा संघ
- नरेन्द्रनगर में गूंज रहे ‘बम-बम भोले’ का जयघोष
- विशाल भंडारे से लौटी शहर की रौनक
वाचस्पति रयाल@ नरेन्द्रनगर।
सावन माह में शिवभक्ति की अलौकिक छटा इन दिनों नरेन्द्रनगर में देखने को मिल रही है। जींद कांवड़ सेवा संघ, हरियाणा की ओर से आयोजित 30वें विशाल कांवड़ सेवा भंडारे ने पूरे शहर को शिवमय बना दिया है। 28 जुलाई से 4 अगस्त तक चलने वाले इस आठ दिवसीय आयोजन में हजारों शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा के साथ आस्था, सेवा और समर्पण का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

वातावरण हुआ भक्तिमय: भंडारे के दौरान पूरे शहर में ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंज रहे हैं। शाम के समय दूधिया रोशनी के बीच होने वाली भव्य शिव आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में आरती में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
29 वर्षों से कर रहे नि:स्वार्थ सेवा: संघ के पदाधिकारियों वेद प्रकाश विरमानी, कृष्ण लाल आहूजा, अनिल बजाज, मंगल आहूजा, मोनू खन्ना, कृष्ण लाल भुटियानी और गौरव नारंग ने बताया कि संस्था पिछले 29 वर्षों से लगातार कांवड़ियों की निस्वार्थ सेवा कर रही है। भोजन, जलपान, विश्राम और प्राथमिक उपचार जैसी सभी व्यवस्थाएं पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन समय है और इसी भावना से संस्था वर्षों से सेवा में जुटी है।
बाजार में लौटी रौनक: भंडारे से न केवल शिवभक्तों को सुविधा मिल रही है, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है। बढ़ती भीड़ से स्थानीय बाजारों में रौनक लौट आई है और व्यापारियों के चेहरों पर भी संतोष दिखाई दे रहा है।
नि:शुल्क दवा वितरण और उपचार भी: कांवड़ियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी संस्था ने बखूबी संभाली है। गजराज सवाय, विकास सवाय, युवराज सवाय और शिवम सवाय पिछले 27 वर्षों से निःशुल्क दवा वितरण और प्राथमिक उपचार की सेवा दे रहे हैं। वहीं किशन भुटियानी, सुरेंद्र चुघ, बल्ली भोला, गोपी शर्मा, दीप बजाज, चमन लाल और अन्य स्वयंसेवक दिन-रात व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में जुटे हैं।
यह विशाल भंडारा केवल भोजन वितरण का आयोजन नहीं, बल्कि शिवभक्ति, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का ऐसा जीवंत उदाहरण बन गया है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनता है।
