Doon Book Festival Blends Creativity, History Talks and Folk Music on April 9
- नेताजी पर गहन विमर्श, बच्चों की रचनात्मक उड़ान और लोक संगीत की धुनों से सजा दून बुक फेस्टिवल
देहरादून@RashtriyVichar#। दून बुक फेस्टिवल में 9 अप्रैल का दिन रचनात्मकता, विचार और संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में सामने आया। बच्चों की कल्पनाशील गतिविधियों से लेकर इतिहास पर गहन विमर्श और लोक संगीत की सुरमयी शाम तक, पूरे दिन आयोजन ने दर्शकों को बांधे रखा।
बाल मंडप इस दिन का सबसे जीवंत केंद्र रहा, जहां करीब 800 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “ऐपन आर्ट कॉर्नर” में बच्चों ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला को न केवल समझा बल्कि उसे अपने हाथों से रचा भी। स्टोरीटेलर राजेश पांडेय ने “Travelling Tree” और “A Tiny Sapling” जैसी कहानियों के जरिए पर्यावरण का संदेश दिया, वहीं डॉ. संगीता अंगोम के पिक्शनरी गेम ने सीखने को खेल में बदल दिया।
साहित्यिक मंच पर इतिहास के पन्ने भी नए अंदाज में खुलते नजर आए। चंद्रचूर घोष और अनुज धर ने सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनसे जुड़े रहस्यों पर गहन चर्चा कर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। उनके विचारों ने यह संदेश दिया कि इतिहास को एक ही दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उसकी जटिलताओं के साथ समझना जरूरी है।
इसी क्रम में संजीव चोपड़ा ने साहित्य के माध्यम से भारत के इतिहास को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल के साथ संवाद में उन्होंने साहित्य को इतिहास समझने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
दिन का समापन एक यादगार सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका प्रियंका मेहर ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। उनके गीतों की मधुर धुनों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।
अब नजरें फेस्टिवल के अगले दिन पर हैं, जहां बाल मंडप में स्वाती गोयल का म्यूजिकल स्टोरीटेलिंग और मुकेश नौटियाल के साथ ‘फूल देई’ थीम पर इलस्ट्रेशन वर्कशॉप बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं वैभव पुरंदरे ‘Patriotism & Revolution from India’s Past’ विषय पर विचार रखेंगे।
इसके अलावा “अमन के फरिश्ते” संवाद सत्र में कर्नल अजय रैना और ब्रिगेडियर सुशील तनवर अपने अनुभव साझा करेंगे, जबकि सांस्कृतिक समापन वंशिका जोशी की प्रस्तुति के साथ होगा।
कुल मिलाकर, दून बुक फेस्टिवल का यह दिन यह साबित कर गया कि किताबें, कला और संस्कृति मिलकर किस तरह समाज में नई ऊर्जा और विचारों का संचार करती हैं।
