Dharmanand Uniyal College Students Lead Forest Fire Awareness Campaign Amid Rising Heat
- धर्मानंद उनियाल महाविद्यालय में वन संरक्षण हेतु सामूहिक शपथ और जागरूकता अभियान का आयोजन
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर।
तेजी से बढ़ती गर्मी ने जहां एक ओर जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं वनों में आग की बढ़ती घटनाएं प्रकृति और जीव-जंतुओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। हर साल अनमोल वन संपदा राख में बदल जाती है और असंख्य वन्य जीव असमय ही जीवन खो देते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में युवा शक्ति का आगे आना एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।
इसी दिशा में धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एक सराहनीय पहल करते हुए वनाग्नि रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया और इसे केवल विचारों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारने का दृढ़ संकल्प लिया।
महाविद्यालय के कैरियर काउंसिलिंग एवं कौशल विकास सेल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आकर्षक चार्ट, रचनात्मक पोस्टर और प्रभावशाली नारों के माध्यम से उन्होंने आमजन को वनाग्नि से होने वाले नुकसान और उससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया।
इस अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों के मन में पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना था।
प्राचार्या प्रो० प्रणिता नंद ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि वन हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों की इस पहल को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मजबूत कदम बताया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ० संजय कुमार ने भी बताया कि यह पहल छात्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय चेतना से जोड़ती है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि वनाग्नि की रोकथाम में जनसहभागिता सबसे बड़ी ताकत है।
उत्तराखंड सरकार एवं वन विभाग, नरेंद्रनगर की पहल से आयोजित इस अभियान को छात्रों और शिक्षकों का व्यापक सहयोग मिला। सागर नेगी, सुनीता थापा, साक्षी, स्वेता, सूरज सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जबकि डॉ० नताशा, डॉ० आराधना, डॉ० हिमांशु जोशी, डॉ० मनोज और अन्य शिक्षकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया।
अंत में सभी ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे वनों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करेंगे और वनाग्नि जैसी आपदाओं को रोकने में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। यह पहल न केवल जागरूकता का संदेश देती है, बल्कि एक बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में मजबूत कदम भी साबित हो रही है।
