AIIMS Rishikesh Organizes Asthma Awareness and Health Check-Up Program on World Asthma Day
- विश्व अस्थमा दिवस पर एम्स ऋषिकेश की पहल, बच्चों और अभिभावकों को दी अस्थमा से बचाव की जानकारी
ऋषिकेश,AIIMS.RSK@Rashtriy Vichar। अस्थमा जैसी गंभीर श्वसन बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और मरीजों को बेहतर उपचार एवं जीवनशैली संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश में विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर विशेष शैक्षिक एवं नैदानिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बाल रोग विभाग और आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अस्थमा से पीड़ित मरीजों, विशेषकर बच्चों और उनके अभिभावकों को बीमारी की सही पहचान, बचाव और दीर्घकालिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करना रहा।
इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की वैश्विक थीम “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए सूजनरोधी इनहेलर की उपलब्धता अभी भी अत्यावश्यक” रखी गई है। इसी के अनुरूप एम्स ऋषिकेश ने रोगियों तक सही उपचार और जागरूकता पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने अस्थमा के कारणों, पर्यावरणीय प्रभावों और नियमित उपचार की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर सही इलाज, नियमित फॉलो-अप और इनहेलर का सही उपयोग अस्थमा को नियंत्रित रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. मीनू सिंह ने अस्थमा से पीड़ित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया और उनसे बीमारी के दौरान होने वाली समस्याओं एवं उपयोग की जा रही दवाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को अलग-अलग प्रकार के इनहेलर के सही इस्तेमाल की तकनीक समझाई और उनका व्यावहारिक अभ्यास भी कराया।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई मरीज इनहेलर का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाते, जिससे दवा का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए सही तकनीक और चिकित्सकीय परामर्श बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत कुमार वर्मा ने प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उपायों, संतुलित आहार, दैनिक सावधानियों और स्वस्थ जीवनशैली की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास, स्वच्छ वातावरण और धूल-धुएं से बचाव अस्थमा नियंत्रण में सहायक होते हैं।
बाल चिकित्सा फुफ्फुसीय विज्ञान एवं गहन चिकित्सा विभाग के प्रो. लोकेश तिवारी, डॉ. व्यास राठौर, आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया, डॉ. श्वेता मिश्रा और डॉ. मृणालिनी सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अस्थमा के लक्षणों की पहचान, नेबुलाइज़र के उपयोग, पीईएफआर मॉनिटरिंग, सहवर्ती रोगों के प्रबंधन और पर्यावरणीय नियंत्रण के महत्व पर उपयोगी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने जनजागरूकता के उद्देश्य से पोस्टर प्रदर्शनी लगाई और लोगों को अस्थमा से बचाव के उपायों की जानकारी दी।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की फॉलो-अप जांच भी की और उन्हें एम्स ऋषिकेश में प्रत्येक बुधवार दोपहर 2 बजे आयोजित होने वाली बाल चिकित्सा पल्मोनोलॉजी क्लिनिक तथा संस्थान की टेली फॉलो-अप सेवाओं के बारे में जानकारी देकर इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
