Uttarakhand High Court Summons Health Secretary Over Poor Health Services and Doctors’ Transfers
- डॉक्टरों के तबादलों पर मांगी कार्ययोजना
- नैनीताल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की प्रगति रिपोर्ट भी एक सप्ताह में पेश करने के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हो रहे स्थानांतरण के मुद्दे पर राज्य सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट पर आधारित जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए।
तबादले किए डॉक्टर्स के बदले प्रतिस्थानी क्या व्यवस्था की गई: सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब बड़ी संख्या में डॉक्टरों के तबादले किए जा रहे हैं, तो उनकी जगह नए चिकित्सकों की तैनाती की क्या व्यवस्था की गई है। अदालत ने सरकार को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना और सुझाव भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए और आम जनता को बेहतर उपचार मिलना चाहिए।
सेनेटोरियम अस्पताल की मांगी प्रगति रिपोर्ट: खंडपीठ ने नैनीताल स्थित सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने के मामले में भी पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
राज्य सरकार बोली बजट मंजूर होते ही शुरू किया जाएगा काम: राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर सरकार को भेजी जा चुकी है। फिलहाल बजट स्वीकृति का मामला वित्त विभाग में लंबित है। बजट मंजूर होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
अदालत बोली, विस्तृत जवाब देना होगा: हाईकोर्ट के इस रुख को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सरकार को डॉक्टरों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परियोजना की प्रगति पर अदालत के समक्ष विस्तृत जवाब देना होगा।
