Nanda Devi Lokjat Yatra 2026 Schedule Released, Pilgrimage to Begin on September 5
- वेदनी बुग्याल तक पहुंचेगी यात्रा
- कैलाश विदाई की परंपरा निभाएंगे श्रद्धालु
- राजजात-2027 की तैयारियों को भी मिलेगी गति
- देवराड़ा से जारी हुआ नंदादेवी लोकजात का दिन-पट्टा
- वेदनी बुग्याल तक जाएगी डोली
चमोली@RASTRIY VICHAR। हिमालय की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रतीक श्री नंदादेवी लोकजात यात्रा-2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी वर्ष प्रस्तावित ऐतिहासिक श्री नंदादेवी राजजात यात्रा-2027 की पृष्ठभूमि में इस वर्ष आयोजित होने वाली लोकजात यात्रा का दिन-पट्टा श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा से बधाण क्षेत्र के सयानों द्वारा विधिवत जारी कर दिया गया है। यात्रा का आयोजन 5 सितंबर से 25 सितंबर तक किया जाएगा।
कार्यक्रम को दिया अंतिम रूप: बुधवार को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में मंदिर समिति अध्यक्ष भुवन हटवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यात्रा कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। केंद्रीय समिति मां नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण के अध्यक्ष सुशील रावत और सचिव पृथ्वीपाल सिंह बुटोला ने बताया कि वर्ष 2027 में होने वाली राजजात यात्रा को देखते हुए इस वर्ष की लोकजात यात्रा को भी पारंपरिक और भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।
देवराड़ा से जारी हुआ दिन-पट्टा: बैठक में बताया गया कि थराली, देवराड़ा, कुलसारी, वांण सहित विभिन्न स्थानों पर हुई बैठकों और कुरूड़ के गौड़ ब्राह्मणों की सहमति के बाद इस बार यात्रा का दिन-पट्टा देवराड़ा से जारी किया गया है। पूर्व में कुरूड़ सिद्धपीठ से जारी लगपट्टा में आवश्यक संशोधन भी किए गए हैं।
इन मार्गों से गुजरेगी यात्रा: जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा 5 सितंबर को नंदानगर ब्लॉक स्थित नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू होगी। चरबंग, मदकोट, उस्तोली, भेटी, सोल डुंग्री, सूना, थराली, चेपड़ो, धरातल्ला, इच्छोली, फल्दियागांव, पिलखड़ा, मुंदोली, लोहाजंग और वांण होते हुए 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी।
वेदनी बुग्याल में होगी विषेश पूजा-अर्चना: वेदनी बुग्याल में मां नंदादेवी की विशेष पूजा-अर्चना और सप्तमी की जात के बाद कैलाश विदाई की पौराणिक परंपरा निभाई जाएगी।
25 सितंबर को पहुंचेंगी देवराड़ा: इसके बाद डोली वापसी यात्रा शुरू करेगी, जो बांक, ल्वाणी, उलंग्रा, बेराधार, गोठिंड़ा, कुराड़ और ढुंगाखोली होते हुए 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा अगले छह माह के लिए मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगी।
हिमालयी परंपराओं का जीवंत प्रतीक: नंदादेवी लोकजात यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और हिमालयी परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यात्रा को लेकर पूरे बधाण क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और श्रद्धालु अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।
