25 साल बाद भी कायम जनविश्वास: अयोध्या प्रसाद उनियाल का कुमाल्डा में भव्य नागरिक अभिनंदन
वाचस्पति रयाल @ नरेंद्रनगर#RashtriyVichar। सरकारी सेवा में किसी अधिकारी की विदाई यदि किसी राजघराने के राजकुमार के विवाह जैसी भव्यता लिए हुए हो और भारी बारिश के बावजूद हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़े, तो यह स्पष्ट संकेत होता है कि उस अधिकारी ने अपने सेवाकाल में केवल सरकारी दायित्व ही नहीं निभाए, बल्कि जनता के दिलों में भी अमिट स्थान बनाया। ऐसा ही सम्मान मिला टिहरी जनपद के नरेंद्रनगर तहसील से सेवानिवृत्त हुए तहसीलदार अयोध्या प्रसाद उनियाल को।
ऐतिहासिक बना विदाई समारोह: नरेंद्रनगर तहसील सभागार में आयोजित विदाई समारोह ऐतिहासिक बन गया। पहली बार किसी तहसीलदार की विदाई के लिए पूरे तहसील परिसर को विशेष रूप से सजाया और संवारा गया। समारोह में राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, पुलिस, जल निगम, जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, सिंचाई, नगर पालिका सहित अनेक विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

भारी बारिश में भी नहीं डिगा उत्साह: मूसलाधार बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि अयोध्या प्रसाद उनियाल ने अपने पूरे सेवाकाल में निष्पक्षता, पारदर्शिता, मृदुभाषिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य किया। समस्या के त्वरित समाधान, स्पष्ट निर्णय क्षमता और बेबाक कार्यशैली ने उन्हें आम जनता से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक सभी के बीच लोकप्रिय बनाया।
अनगिनत मिले उपहार: समारोह में उन्हें शॉल, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह और अनगिनत उपहार भेंट किए गए। विदाई के बाद कर्मचारियों और शुभचिंतकों का लंबा वाहन काफिला उन्हें उनके देहरादून स्थित नत्थूवाला निवास तक छोड़ने गया। इस दौरान विदाई की भावुकता हर चेहरे पर साफ दिखाई दी।
- 25 साल बाद भी नहीं भूले लोग
- कुमाल्डा में हुआ भव्य नागरिक अभिनंदन
अयोध्या प्रसाद उनियाल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 25 वर्ष पहले जहां वे कुमाल्डा क्षेत्र में पटवारी के रूप में कार्यरत थे, वहां के लोगों ने उनकी सेवानिवृत्ति की सूचना मिलते ही उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित कर भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया।
दिलों में बसा आत्मीय व्यवहार : क्षेत्रवासियों ने कहा कि श्री उनियाल ने केवल सरकारी कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह लोगों के सुख-दुख में साथ निभाया। उनकी ईमानदारी, सरल स्वभाव, जनहित के प्रति समर्पण और आत्मीय व्यवहार को आज भी लोग भूले नहीं हैं। यही कारण है कि पच्चीस वर्ष बाद भी क्षेत्र की जनता ने उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी अधिकारी को सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी जनता सम्मान के साथ याद करे, तो इससे बड़ा पुरस्कार कोई नहीं हो सकता। यह उनकी ईमानदार सेवा और जनता से बने आत्मीय रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में खेल परिषद के अध्यक्ष जयकृष्ण उनियाल, मंडी परिषद के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप बुटोला, परेंद्र सकलानी, राज्य आंदोलनकारी कमल सिंह रावत, प्रेम सिंह रावत, पूर्ण सिंह, कस्तूरी उनियाल, जसवंत सिंह रावत, पूरन सिंह रावत, राजेंद्र नेगी, रामेश्वरी, दिनेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने शॉल, स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
राजनीति में दूसरी पारी की चर्चा तेज
अपनी लोकप्रियता और राजनीतिक समझ के कारण अयोध्या प्रसाद उनियाल के राजनीति में प्रवेश की चर्चाएं भी तेज हैं। बताया जा रहा है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता उन्हें अपनी पार्टी से जुड़ने का आग्रह कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर श्री उनियाल ने कहा कि फिलहाल वे पारिवारिक कार्यों में व्यस्त हैं। उन्होंने इतना जरूर कहा कि एक ऐसी राजनीतिक पार्टी भी है, जहां उनके अनेक मित्र हैं, लेकिन उसमें वे शामिल नहीं होंगे।
जनता का स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी: सम्मान से अभिभूत अयोध्या प्रसाद उनियाल ने कहा कि जनता का प्रेम, विश्वास और सम्मान ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि पूरे सेवाकाल में उन्होंने ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और आगे भी समाजहित में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
