Semicon 2.0 Approved: India Unveils ₹1.27 Lakh Crore Plan to Become Global Chip Hub
- मोबाइल से मिसाइल तक, अब ‘मेड इन इंडिया’ चिप का दम
- भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी
नई दिल्ली@Rashtriy Vichar। दुनिया में सेमीकंडक्टर यानी चिप को 21वीं सदी का ‘नया तेल’ माना जा रहा है। मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सुपरकंप्यूटर, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन और अंतरिक्ष तकनीक तक हर आधुनिक उपकरण की बुनियाद सेमीकंडक्टर चिप है। इसी रणनीतिक क्षेत्र में भारत को वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है।
इस योजना का उद्देश्य केवल देश में चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं, बल्कि चिप डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास करना है। सरकार का मानना है कि इससे भारत विदेशी चिप आपूर्ति पर निर्भरता कम कर सकेगा और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
सरकार नई सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना के साथ चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और आवश्यक सामग्री के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगी। भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों को स्वदेशी चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में आधुनिक प्रशिक्षण के जरिए बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियर और तकनीशियन तैयार किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक चिप संकट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सेमीकंडक्टर किसी भी देश की आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे में सेमीकॉन 2.0 भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रक्षा, दूरसंचार, एआई और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे निवेश, निर्यात और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
मोबाइल निर्माण को 62,500 करोड़ का बूस्ट
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके साथ 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन निर्माण योजना को भी मंजूरी दी है। सरकार का दावा है कि दोनों योजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात बढ़ेगा और हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
