Political activity intensifies in Uttarakhand over the Ketan murder case as parties engage in strategic positioning ahead of upcoming elections, turning the incident into a major political talking point
- हरिद्वार में नगीना सांसद चंद्रशेखर को रोकने पर गरमाया राजनीतिक माहौल
- पीड़ित परिवार से मिलने टिहरी जा रहे थे सांसद,धरने पर बैठे
- पुलिस संग हुई धक्का -मुक्की
हरिद्वार@Rashtriy Vichar। टिहरी के चर्चित केतन हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गर्माती नजर आ रही है। करीब एक माह पहले हुई इस घटना के बाद अब विभिन्न राजनीतिक दल और नेता इसे लेकर सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है।
रविवार को हरिद्वार में उस समय हाईवोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने टिहरी के लिए रवाना हुए। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए डामकोठी स्थित शंकराचार्य चौक पर बैरिकेडिंग लगाकर उनके काफिले को रोक दिया। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और सांसद अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए।

इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में सामाजिक और जातीय मुद्दों पर विभिन्न दल अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे में केतन हत्याकांड भी अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी और जनसमर्थन जुटाने का विषय बनता दिखाई दे रहा है।
धरने के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया और उनके समर्थकों के साथ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं उनके समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह कदम उठाया गया। पुलिस के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।
फिलहाल केतन हत्याकांड राज्य में दलित वोट बैंक को साधने की जोर-आजमाइस शुरू हो गई है,जिसका केन्द्र हरिद्वार को बनाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि राजनितिक दलों का यह सियासी तीर आगागी विधान सभा चुनाव में निशाने काे साधने में कितना सटिक बैठता है।
