Haldwani May Day Rally: Workers Protest New Labour Codes, Demand Fair Wages and Rights
- ‘कॉरपोरेट जंगलराज’ के खिलाफ एकजुट हुए मजदूर संगठन, शोषण पर सरकार को घेरा
- मजदूर बोले, सरकार 8 घंटे का हक छीनने की कर रही साजिश।
Haldwani@Rashtriy Vichar#। हल्द्वानी के बुधपार्क में विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर विभिन्न ट्रेड यूनियनों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने संयुक्त रूप से विशाल सभा आयोजित की। इसमें ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, किसान महासभा, भीम आर्मी सहित कई संगठनों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने कहा कि 1 अप्रैल से लागू नए श्रम कोड मजदूर अधिकारों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर कर रहे हैं। आठ घंटे का कार्यदिवस अब खतरे में है और ठेका व गिग अर्थव्यवस्था के नाम पर श्रमिकों का शोषण बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देकर मजदूर वर्ग को “कॉरपोरेट जंगलराज” में धकेल रही है।

सभा में यह भी कहा गया कि औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे मजदूर आंदोलनों को सरकार देश-विरोधी बताकर दबा रही है और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की जा रही है। वक्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

मजदूर संगठनों ने मांग रखी कि श्रम-विरोधी कोड रद्द किए जाएं, न्यूनतम मजदूरी 42,000 प्रति माह की जाए, सभी ठेका व संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाए और 8 घंटे से अधिक काम पर दोगुना वेतन सुनिश्चित हो।
सभा में मजदूर आंदोलनों के दमन की निंदा करते हुए कहा गया कि यह संघर्ष केवल वेतन का नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे अब व्यापक जनआंदोलन में बदलना होगा।
ये हैं प्रमुख मांगें
- श्रम-विरोधी, कारपोरेट-परस्त श्रम कोड रद्द करो।
- संघर्षरत मज़दूरों पर दमनकारी कार्रवाई बंद करो! सभी गिरफ़्तार मज़दूरों को बिना शर्त और तुरंत रिहा करो! गिरफ़्तार ट्रेड यूनियन नेताओं को रिहा करो।
- हर महीने 42,000 रुपये और हर दिन 1500 रुपये न्यूनतम मज़दूरी घोषित करो।
- 12 घंटे काम करने की व्यवस्था को बंद करो! 8 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम काम के लिए दोगुनी मजदूरी सुनिश्चित करो।
- आशा, भोजनमाता, आंगनबाड़ी, कॉन्ट्रैक्ट, मानदेय, डेली वेज, अप्रेंटिसशिप, ट्रेनी, फिक्स्ड टर्म सबको परमानेंट करो।
सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में ये रहे शामिल
मई दिवस कार्यक्रम में मुख्य रूप से के के बोरा, बहादुर सिंह जंगी, रजनी जोशी, मनोज पांडे, महेश, चंदन, डॉ कैलाश पाण्डेय, रिंकी जोशी, हेमा तिवारी, यतीश पंत, जोगेंद्र लाल, नवीन बिष्ट, कार्तिक नेगी, एडवोकेट कैलाश जोशी, नफीस अहमद खान, दिनेश आर्य, इस्लाम हुसैन, उमेश तिवारी विश्वास, दीपा आर्य, रीना आर्य, चंपा गिनवाल, अलिशा, हेमा पलड़िया, राहुल रावत, पार्षद रवि वाल्मीकि, पंकज थापा, बची सिंह बिष्ट, धन सिंह गड़िया, राजेन्द्र जोशी, महेश तिवारी, महेश जोशी, मंजू रावत, रोशनी, लीला, पुष्पा, रश्मि, रजनी, चन्द्रशेखर भट्ट, प्रकाश फ़ूलोरिया, अमित कोहली, योगेश, सावित्री, ममता, भारती, तुलसी, कमला, सुनीता मेहरा आदि समेत बड़ी संख्या में मजदूर शामिल रहे
