- कभी सुकून का शहर रहा देहरादून अब गैंगस्टर कनेक्शन के साये में
- विक्रम की मौत ने खड़े किए कई असहज सवाल
देहरादून@रा.वि । झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर और कारोबारी के रूप में पहचाने जाने वाले विक्रम शर्मा की हत्या ने दून की शांत छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। कभी रिटायर्ड अफसरों की कॉलोनियों, हरियाली और सुकून भरी जिंदगी के लिए मशहूर देहरादून अब तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक ढांचे के साथ एक नए खतरे का सामना करता दिख रहा है ।
विक्रम शर्मा वर्षों से शहर में रह रहा था। पड़ोसियों के लिए वह एक सामान्य, शांत और कम बोलने वाला व्यक्ति था। लेकिन हत्या के बाद जैसे-जैसे उसका आपराधिक अतीत सामने आया, शहर स्तब्ध रह गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसका संबंध अपराध जगत से गहराई से जुड़ा रहा, पर स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एक कारोबारी के रूप में ही बनी रही। यही वह परत है जो सबसे अधिक चिंता का विषय है।अपराध अब खुलेआम नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से समाज के भीतर घुलता-मिलता दिख रहा है।
बीते कुछ वर्षों में देहरादून का रियल एस्टेट बाजार तेजी से उभरा है। बाहरी निवेश, आलीशान कोठियां, महंगी गाड़ियां और नए कारोबारी नेटवर्क, इन सबने शहर की तस्वीर बदली है। जानकार मानते हैं कि इसी उछाल ने काले धन को खपाने और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को ‘वैध कारोबारी’ के रूप में स्थापित होने का अवसर भी दिया। नाम और मालिक बदलते रहे, लेकिन निवेश की असल कहानी अक्सर कागजों से बाहर रही।
विक्रम की हत्या को महज गैंगवार का परिणाम मानना शायद जल्दबाजी होगी। यह घटना उस अदृश्य अपराध तंत्र की ओर संकेत करती है, जो शहर के भीतर चुपचाप अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है। जांच एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल हत्या की गुत्थी सुलझाने की नहीं, बल्कि उन आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क की भी पड़ताल करने की है, जिनके सहारे ऐसे लोग वर्षों तक बेखौफ रहते हैं।
दूनवासियों के लिए यह घटना एक चेतावनी है, शहर की बदलती चमक के पीछे छिपे साए को पहचानने और कानून व्यवस्था को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। पुलिस के लिए शहर की कानून व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
