- रक्षाबंधन पर राजकीय इंटर कॉलेज दौंक की अनूठी पहल
- 27 नक्षत्रों के प्रतीक पौधों से सजी नक्षत्र वाटिका
वाचस्पति रयाल@ नरेन्द्रनगर। रक्षाबंधन के पर्व से पहले जौनपुर विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज दौंक की छात्राओं ने प्रकृति के प्रति अपने आत्मीय जुड़ाव की अनूठी मिसाल पेश की। छात्राओं ने पेड़ों और पौधों को राखी बांधकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान छात्राओं ने पौधों को राखी बांधने के साथ उन्हें गले लगाकर प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और अपनत्व का भाव भी व्यक्त किया। पर्यावरण संरक्षण का यह दृश्य विद्यालय परिसर में मौजूद लोगों को भावुक करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराने वाला रहा।
पेड़ों की रक्षा करना प्रत्येक की नैतिक जिम्मेदारी: लगातार घटते वन क्षेत्र, बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते दोहन के बीच बच्चों की यह पहल खास संदेश देने वाली रही। छात्राओं ने बताया कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन और समूचे जीव-जगत के अस्तित्व का आधार हैं। ऐसे में उनकी रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
त्योहारों को पर्यावरण से जोड़े: कार्यक्रम संयोजक संजय प्रकाश सेमवाल ने कहा कि यदि हमारी पारंपरिक मान्यताओं और त्योहारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए तो प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना समाज में और मजबूत हो सकती है। रक्षाबंधन के माध्यम से पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना इसी सोच का प्रतीक है।
बनाई नक्षत्र वाटिका: इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने आशीष सगाई और इन्दु सैनी के मार्गदर्शन में नागराजा मंदिर के समीप नक्षत्र वाटिका का निर्माण भी किया। वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतीक स्वरूप आंवला, बांस, पलाश, बेल, अर्जुन, नींबू सहित विभिन्न प्रजातियों के 27 पौधे रोपे गए। विद्यार्थियों ने इन पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया।
पहल अनुकरणीय: विद्यालय के प्रधानाचार्य राम औतार ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने परिवेश को बेहतर बनाने के लिए परंपराओं को आधुनिक सोच और वर्तमान जरूरतों के अनुरूप मनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों की पहल को अनुकरणीय बताया।
छात्र-छात्राओं की पहल की हो रही चहुं ओर प्रशंसा: कार्यक्रम में हेड गर्ल स्वाति के साथ प्रियंका, सरस्वती, बबीता, अनिल, रंजना सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं और स्टाफ मौजूद रहे। आसपास के जागरूक लोगों ने बच्चों की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की ऐसी छोटी पहलें आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
