A seminar on sustainable development and climate change was held at Shaheed Belmati Chauhan Government College, highlighting climate impacts in Himalayan and mountainous regions.
- पर्यावरण संरक्षण, जल-ऊर्जा बचत और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर
- सतत विकास एवं जलवायु विषय पर महाविद्यालय पोखरी में कार्यक्रम आयोजित
वाचस्पति रयाल@ नरेन्द्रनगर। पट्टी क्वीली के पोखरी स्थित शहीद बेलमती चौहान राजकीय महाविद्यालय में अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS)-2026 के तहत भूगोल विभाग के तत्वावधान में ‘सतत विकास एवं जलवायु’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशिबाला वर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को सतत विकास, जलवायु परिवर्तन के कारणों एवं प्रभावों तथा जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना रहा।
पर्वतीय क्षेत्रों में दिख रहा दुष्प्रभाव: कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानवीय विकास से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, जलस्रोतों पर बढ़ता दबाव, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएं इसके बढ़ते प्रभावों को स्पष्ट कर रही हैं। विशेष रूप से हिमालयी और पर्वतीय क्षेत्रों में इसके दुष्प्रभाव अधिक संवेदनशील रूप में सामने आ रहे हैं।
कार्यक्रम संयोजक एवं भूगोल विभाग प्रभारी डॉ. नीमा भेतवाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, वनों की सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में प्रो. डीपी सिंह, डॉ. गणेश भागवत, डॉ. मुकेश सेमवाल, डॉ. बंदना सेमवाल, योगाचार्य अजय तिवारी, प्रयोगशाला सहायक अंकित कुमार, सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
