- एआई और महंगाई का दोहरा असर: तेल 100 डॉलर पार, रोजगार और आम बजट पर खतरे के संकेत
नीरज सती@ रामनगर,रा. वि.। वैश्विक आर्थिक हालात एक बार फिर चिंता बढ़ाने लगे हैं। दुनिया भर के शेयर बाजारों में आई तेज गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम भी बढ़ने लगते हैं। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू खर्चों का संतुलन बिगड़ जाता है और महंगाई का दबाव बढ़ जाता है।अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और रोजगार के अवसर घटते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति और घरेलू खपत पर पड़ेगा। ऐसे समय में विशेषज्ञ सरकार से महंगाई पर नियंत्रण, राहत उपायों और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की मांग कर रहे हैं, ताकि आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में आम नागरिकों को राहत मिल सके।
एआई टूल्स का बढ़ता प्रभाव,रोजगार को लेकर बनी असमंजस की स्थिति
इस बीच आईटी सेक्टर से भी चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव और लागत घटाने की रणनीति के चलते कई बड़ी टेक कंपनियां नई भर्तियों में कमी या कर्मचारियों की छंटनी की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। हाल ही में एंथ्रोपिक के एआई टूल्स के बढ़ते प्रभाव के बाद तकनीकी कंपनियों में रोजगार को लेकर असमंजस की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
भारत में आईटी सेक्टर लगभग 54 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है और हर साल करीब तीन से चार लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करता है। यदि एआई तकनीक के कारण कंपनियां भर्ती कम करती हैं या नौकरियों में कटौती करती हैं, तो देश में रोजगार को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है, जिसका सीधा असर युवा पेशेवरों और तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं पर पड़ेगा।
खाड़ी देशों की मौजूदा आर्थिक हालात बन रहे संकट
इसके अलावा खाड़ी देशों की मौजूदा आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की नौकरियों पर भी पड़ सकता है।
