₹1 Crore Footpath Maintenance Under Scanner: Complaint Triggers PWD Probe in Uttarakhand
- चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग में वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर
- कागजों में करोड़ों, जमीन पर बदहाल रास्ता!
- मार्ग की जांच की मांग, जनआंदोलन की चेतावनी
उखीमठ। चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग के रखरखाव और मरम्मत पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा अब गंभीर सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और लोक निर्माण विभाग (PWD) में भी हलचल तेज हो गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय अभिलेखों में भारी-भरकम खर्च दिखाया गया है, लेकिन धरातल पर उसका असर कहीं नजर नहीं आता।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत में पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने, कार्यों का स्थलीय सत्यापन करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर अभिलेख जुटाने और कार्यों का ब्यौरा तैयार करने की चर्चा है, हालांकि विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इधर कालीमठ घाटी के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं हुई अथवा शिकायत को दबाने का प्रयास किया गया तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता श्रेष्ठ प्रकाश भट्ट ने मांग की है कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, निर्माण एवं रखरखाव कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण हो और पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता न हो।
इस बीच स्थानीय सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित ठेकेदार एक दिन कुछ मजदूरों के साथ चौमासी से आगे तक पहुंचा, लेकिन शाम ढलते ही बिना कोई ठोस कार्य किए वापस लौट गया। इससे ग्रामीणों के बीच और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज इस शिकायत के बाद शासन और लोक निर्माण विभाग जांच को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या सार्वजनिक धन के उपयोग का वास्तविक हिसाब जनता के सामने आ पाता है।
” यदि वास्तव में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं तो पैदल मार्ग की गुणवत्ता, सुरक्षा और सुविधाओं में उसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई देना चाहिए। कई स्थानों पर आज भी सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हैं, मार्ग उखड़ा हुआ है, सुरक्षा दीवारें टूटी पड़ी हैं और जल निकासी की समुचित व्यवस्था तक नहीं है। बरसात के मौसम में यह मार्ग यात्रियों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के लिए और अधिक जोखिमभरा बन जाता है।”
ओ.पी. भट्ट, शिकायतकर्ता
“किसी भी निर्माण कार्य की एक वर्ष तक जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। पैदल मार्ग के रखरखाव के लिए स्वीकृत धनराशि से निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराया जाएगा।”
नरेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता
लोक निर्माण विभाग
