Brahma Kamal and colorful Himalayan flowers bloom across Ukhimath’s bugyals during Sawan, creating a stunning natural spectacle for tourists and nature lovers.
- मखमली हरियाली पर रंग-बिरंगे पुष्पों की चादर
- पर्यटकों को लुभा रही हिमालयी वादियां
चमोली@RASHTRIY VICHAR। सावन माह के आगमन के साथ ही हिमालय की तलहटी में बसे ऊंचाई वाले बुग्याल इन दिनों रंग-बिरंगे पुष्पों से गुलजार हो उठे हैं। मखमली हरी घास के बीच खिल रहा दुर्लभ ब्रह्म कमल और विभिन्न प्रजातियों के पुष्प यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं। दूर तक फैली हरियाली पर बिखरी फूलों की रंगीन चादर प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

मानसून के दौरान पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम मिलने से बुग्यालों में वनस्पतियां और पुष्प पूरे यौवन पर हैं। कहीं सफेद, कहीं पीले, गुलाबी और बैंगनी रंग के फूल हरी घास के बीच अपनी अलग छटा बिखेर रहे हैं। सुबह ओस की बूंदों से नहाए फूलों पर पड़ती सूर्य की किरणें इस दृश्य को और मनोहारी बना देती हैं। बादलों की आवाजाही, ठंडी हवाओं और दूर दिखाई देती हिमालयी चोटियों के बीच पुष्पों से सजे बुग्याल किसी प्राकृतिक चित्रकारी से कम नहीं लग रहे।
सावन में ब्रह्म कमल का विशेष आकर्षण
हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला ब्रह्म कमल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन भगवान शिव को समर्पित माह है और इस दौरान ब्रह्म कमल के दर्शन को श्रद्धा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यह पुष्प भगवान शिव को प्रिय है। यही वजह है कि इसके खिलने का समय श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहता है।
पर्यटन और संरक्षण दोनों जरूरी
ब्रह्म कमल सहित अन्य हिमालयी पुष्पों से सजे बुग्याल पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। गर्मियों और मानसून में पर्यटक, ट्रैकर और प्रकृति प्रेमी इन क्षेत्रों का रुख करते हैं। शिक्षाविद रविन्द्र भट्ट के अनुसार सावन में बुग्यालों की सुंदरता अपने चरम पर पहुंच जाती है। प्रकृति प्रेमी शंकर सिंह पंवार ने कहा कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
जैव विविधता के महत्वपूर्ण अंग
प्रकृति विशेषज्ञों के अनुसार बुग्याल हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे में फूलों को तोड़ने, प्लास्टिक कचरा फैलाने और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाने से बचना जरूरी है। संरक्षण के प्रयासों से ही इनकी अनुपम सुंदरता आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी। सावन में ब्रह्म कमल और अन्य पुष्पों से सजे बुग्याल इन दिनों हिमालय की अनुपम प्राकृतिक छटा का जीवंत उदाहरण बने हुए हैं।
