- जंगल धधके, धुएं से घुटने लगा सांसों का दम , वन विभाग और ग्रामीणों की कड़ी जंग जारी
- चौड़ से नागनाथ रेंज तक विकराल वनाग्नि, लाखों की वन संपदा राख, पहाड़ में बढ़ी दहशत
पोखरी/ऊखीमठ। गढ़वाल के कई वन क्षेत्रों में इन दिनों भीषण वनाग्नि ने विकराल रूप धारण कर लिया है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की नागनाथ रेंज से लेकर तल्लानागपुर क्षेत्र के चौड़ और उर्खोली के जंगलों तक आग तेजी से फैल रही है। आग की लपटों ने हजारों पेड़ों, वनस्पतियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को अपनी चपेट में ले लिया है। लगातार फैल रहे धुएं से आसपास के गांवों में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है, जबकि दमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों की परेशानियां बढ़ गई हैं।

नागनाथ रेंज में रातभर धधकते रहे जंगल
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की नागनाथ रेंज के शरणाचाई, वीणा नागधार और चमसिल के चीड़ के जंगलों में रविवार रात अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने बड़े वन क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया। जंगलों से उठते धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देता रहा।
शरणाचाई वन पंचायत के सरपंच दिगपाल राणा, कमल सिंह नेगी और भरत रावत ने बताया कि आग रात करीब दस बजे लगी। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम सोमवार सुबह से आग बुझाने में जुट गई। वन क्षेत्राधिकारी कपिल गुसाईं के नेतृत्व में वन कर्मियों ने कई स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए घंटों मशक्कत की।
कुजासू और दैवखाल तक पहुंची आग
सोमवार दिन में नागनाथ रेंज के कुजासू क्षेत्र के जंगलों में भी अचानक आग भड़क उठी। वन दरोगा प्रकाश कण्डारी ने बताया कि दुर्गम और चट्टानी भूभाग के साथ तेज हवाएं आग बुझाने में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं।
उधर गोपेश्वर रेंज के देवर-कनेरी क्षेत्र में लगी आग नागनाथ रेंज के दैवखाल तक फैल गई है। आग लगातार तेजी से फैल रही है। वन दरोगा मोहन सिंह वर्तवाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम यहां भी मोर्चा संभाले हुए है।
आग बुझाने में वन दरोगा मदन मोहन सेमवाल, प्रकाश कण्डारी, मोहन सिंह वर्तवाल, आनन्द सिंह रावत, वन आरक्षी संदीप कण्डारी, महेशी, ममता, देवेन्द्र राणा समेत फायर वाचर और स्थानीय ग्रामीण लगातार जुटे हुए हैं।
तल्लानागपुर के चौड़ और उर्खोली में वनाग्नि का कहर
ऊखीमठ के तल्लानागपुर क्षेत्र की न्याय पंचायत चोपता अंतर्गत चौड़ और उर्खोली के घने जंगल भी इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे लाखों रुपये की बहुमूल्य वन संपदा जलकर राख हो गई है।
बीते दो दिनों से धधक रहे जंगलों में चीड़, बांज, बुरांश सहित कई महत्वपूर्ण प्रजातियों के पेड़-पौधे जल चुके हैं। आग के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जंगलों से उठता घना धुआं गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
प्रधान उर्खोली आजाद खत्री ने बताया कि आग की सूचना समय रहते वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण खुद भी पेड़ों की टहनियों और हरे पौधों की मदद से आग रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रामीण दिनेश सिंह नेगी ने बताया कि तेज हवाओं और कठिन पहाड़ी भूभाग के कारण आग पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल हो रहा है। उन्होंने लोगों से जंगलों के आसपास सतर्कता बरतने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न करने की अपील की।
पर्यावरण को भारी नुकसान
वनाग्नि के कारण पर्यावरण को व्यापक क्षति पहुंच रही है। वन्यजीवों के सुरक्षित ठिकाने नष्ट हो रहे हैं और जैव विविधता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने सरकार से स्थायी वन सुरक्षा उपाय लागू करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
