- भाजपा की नई रणनीति पर तेज हुई चर्चाएं
देहरादून@रा.वि.। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के शीर्ष नेता नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा सीट के लिए नामांकन भरने की खबर ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या उन्हें बिहार की सक्रिय राजनीति से हटाकर राज्यसभा भेजने की तैयारी के पीछे मक़सद क्या है। नीतीश के राज्यसभा जाने से बिहार में सत्ता संतुलन को भविष्य की चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी अब अपना मुख्यमंत्री चेहरा स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा राज्यों में नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में बिहार इस नई रणनीति की पहली प्रयोगशाला बन सकता है।
बिहार की इस सियासी हलचल का असर अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी अब अन्य राज्यों में भी इस प्रयोग को अपना सकती हैं। इसके प्रबल संकेत माने जा रहे हैं ।
उत्तराखंड की राजनीति में भी इसको लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं। प्रदेश में पहले भी समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में बिहार की घटनाओं ने एक बार फिर राज्य के सियासी माहौल को गर्मा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा राज्यों में नई ऊर्जा और नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की रणनीति अपनाती है तो उसका असर उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बिहार से उठी यह सियासी चर्चा देशभर की राजनीति में नई संभावनाओं और अटकलों को जन्म दे रही है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह चर्चा सिर्फ अटकलें साबित होती है या फिर भारतीय राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की एक नई शुरुआत देखने को मिलती है।
