- RSS प्रमुख ने देहरादून में पूर्व सैनिकों से किया संवाद
- राष्ट्र निर्माण में समाज की ताकत पर दिया जोर
देहरादून @ रा.वि.। RSS Chief Mohan Bhagwat ने अग्निवीर योजना को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह एक “प्रयोग” है और अनुभव के आधार पर इसमें बदलाव की गुंजाइश संभव है। उनका जोर इस बात पर रहा कि सैन्य तैयारी और नेतृत्व की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट नेतृत्व और सुदृढ़ सैन्य तैयारी किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।

उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने देहरादून के निम्बूवाला स्थित Himalayan Cultural Center में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम’ में पूर्व सैनिकों और पूर्व सेना अधिकारियों से विस्तृत संवाद किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, युवा नीति और शासन व्यवस्था जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई।
राष्ट्र की मजबूती समाज से
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र का भाग्य समाज की शक्ति पर निर्भर करता है। “समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी मजबूत होगी,” उन्होंने कहा। उनका मानना था कि संगठित और संस्कारित समाज ही देश को दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
पड़ोसी देशों और कश्मीर पर टिप्पणी
भागवत ने नेपाल, बांग्लादेश और कश्मीर को ऐतिहासिक रूप से एक सांस्कृतिक क्षेत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सतर्क और संतुलित नीति आवश्यक है।
समरसता, हिंदू दृष्टि और सामाजिक संवाद
उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” की भारतीय अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदू विचार मूलतः उदार है और समाज में समरसता जरूरी है। मंदिर, जल स्रोत और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थल सभी के लिए खुले होने चाहिए। सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए उन्होंने संवाद और शास्त्रार्थ की परंपरा को मजबूत करने की अपील की।
भ्रष्टाचार, युवा और पलायन
भ्रष्टाचार पर उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की नहीं, बल्कि नियत की समस्या है। बच्चों में संस्कार, आय में बचत और समाज के लिए दान की भावना विकसित करना आवश्यक है। पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
UCC, आरक्षण और जनसंख्या नीति
समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे विवाद कम होंगे। आरक्षण और जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उन्होंने धैर्य और व्यापक सहमति की आवश्यकता पर बल दिया तथा जनसंख्या असंतुलन पर समग्र नीति बनाने की बात कही।
सेवा के लिए आह्वान
कार्यक्रम के अंत में भागवत ने पूर्व सैनिकों से कहा कि सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ समाज में सेवा कार्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने संघ के 1 लाख 30 हजार सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का आग्रह किया और शताब्दी वर्ष में उनकी सक्रिय भागीदारी को मूल्यवान बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ।
