- Gen Z के बदलते तेवरों के बीच युवाओं को अपना सियासी खेवनहार बनाने की कोशिश?
- ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ पर उठे सवाल
देहरादून@Rashtriya Vichar। देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में युवा पीढ़ी के बीच उभरते Gen Z आंदोलनों और राजनीतिक असंतोष ने सत्ता के सामने नई चुनौती खड़ी की है। ऐसे माहौल में उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से शुरू किया गया ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान केवल विद्यार्थियों के विचार जानने की पहल है या बदलते युवा मिजाज को समय रहते अपने साथ जोड़ने की रणनीति, यह सवाल अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनता दिख रहा है। चर्चा का विषय बनना इस लिए भी लाजमी है कि जब सरकार विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ी हो।
बकौल सरकार, अभियान के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार और विजन मुख्यमंत्री को भेजे हैं। सरकार इसे युवा सहभागिता और नीति निर्माण में नई पीढ़ी की भागीदारी के रूप में पेश कर रही है, लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखें तो भावी चुनावी आहट के बीच इतने बड़े युवा वर्ग से सीधे संवाद स्थापित करने का यह प्रयास मुख्यमंत्री धामी की सियासी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी माना जा सकता है।
युवाओं की नब्ज टटोलने की कोशिश?
मुख्यमंत्री धामी ने 10 अगस्त को ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों से अपने सपनों के उत्तराखंड को लेकर विचार साझा करने का आह्वान किया था। 24 अगस्त तक विचार पोर्टल पर अपलोड किए गए और अब इनका मूल्यांकन मुख्यमंत्री के साथ विशेषज्ञों की टीम कर रही है।
राजनीतिक रूप से इस पहल की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उत्तराखंड की राजनीति में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। रोजगार, शिक्षा, पर्यटन, तकनीक, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर युवाओं से सीधे सुझाव मांगकर सरकार एक साथ दो संदेश देने की कोशिश करती नजर आती है—पहला, युवा केवल वोटर नहीं बल्कि नीति निर्माण के सहभागी हैं और दूसरा, सरकार उनकी आकांक्षाओं को सुन रही है।
2.67 लाख युवाओं तक सीधा राजनीतिक-सामाजिक संवाद
राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं के कुल 2,96,426 विद्यार्थियों में से 2,67,744 विद्यार्थियों की भागीदारी अपने आप में बड़ा आंकड़ा है। रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और चमोली में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों द्वारा निबंध अपलोड किए जाने का दावा अभियान की व्यापक पहुंच को दिखाता है।
देहरादून में 63,666 विद्यार्थियों में से 47,358 ने भाग लिया। पौड़ी, अल्मोड़ा, हरिद्वार, टिहरी, बागेश्वर, नैनीताल और उत्तरकाशी में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए हैं। यानी सरकार ने महज राजधानी या बड़े शहरों के युवाओं तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश के पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में एक बड़ा युवा नेटवर्क तैयार किया है।
Gen Z के दौर में ‘विजन’ की राजनीति
दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों में Gen Z की राजनीतिक सक्रियता ने यह संकेत दिया है कि नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़कर रोजगार, अवसर, पारदर्शिता, शिक्षा, तकनीक, पर्यावरण और शासन में अपनी भागीदारी चाहती है। ऐसे समय में उत्तराखंड सरकार का युवाओं से उनके ‘सपनों’ और ‘विजन’ पर सीधे संवाद करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि सरकार इसे नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी की अभिनव पहल बता रही है, लेकिन विपक्ष के लिए यह सवाल उठाने का मौका भी है कि क्या युवाओं के विचार वास्तव में नीतियों में दिखाई देंगे या यह केवल उन्हें राजनीतिक रूप से प्रभावित करने की कवायद बनकर रह जाएगा।
140 युवाओं को मिलेगा सत्ता के गलियारों तक पहुंचने का मौका
अभियान के तहत श्रेष्ठ 140 विचारों का चयन किया जाना है। चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री स्वयं भी इन विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। श्रेष्ठ विचार देने वाले विद्यार्थियों को करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग समेत प्रोत्साहन और पुरस्कार दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
यानी सरकार ने युवाओं को केवल निबंध लिखने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि चयनित प्रतिभागियों को सीधे शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का रास्ता भी बनाया है। यही पहल इस पूरे अभियान को महज स्कूली प्रतियोगिता से आगे ले जाती है।
सियासी संदेश साफ या महज संयोग?
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार वर्तमान उत्तराखंड को भी नई दिशा दे सकते हैं और अच्छे सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा। सरकार की भाषा में यह युवा सहभागिता और नीति निर्माण का प्रयोग है।
लेकिन मौजूदा राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में इस अभियान को केवल प्रशासनिक पहल मानना भी अधूरा विश्लेषण होगा। Gen Z के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और युवाओं के बदलते सवालों के बीच उत्तराखंड में 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित करना धामी सरकार की राजनीतिक दूरदर्शिता भी हो सकती है। सवाल सिर्फ इतना है कि इन युवाओं के सपनों को सरकार कितनी हद तक वास्तविक नीतियों में बदलती है।
