- झोड़ा-चाचरी से गूंजा धारचूला देहात
- परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प
नदीम परवेज@ धारचूला। सीमांत क्षेत्र धारचूला में सातों-आठों गौरा महेश पर्व की रौनक लगातार बढ़ रही है। धारचूला देहात गांव में आयोजित गौरा महेश पूजन कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और झोड़ा-चाचरी ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ पर्व में भाग लेकर अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखा। कार्यक्रम में धारचूला विधायक हरीश धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उत्सव हमारी सांस्कृतिक पहचान: विधायक धामी ने गौरा महेश की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र के पारंपरिक उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता के मजबूत आधार हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना भी जरूरी है।
आयोजन को लेकर युवाओं का आह्वान: उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर प्रयास कर ऐसे पारंपरिक आयोजनों को पंजीकृत कराने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में पहल की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि उत्सवों में बच्चों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि वे अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सकें और इन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समझें।
विधायक के कार्यों को सराहा: ग्राम प्रधान नर्मदा रावल ने विधायक की सक्रिय कार्यशैली की सराहना की। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष शशी थापा, व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा समेत क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। झोड़ा-चाचरी और पारंपरिक गीत-संगीत के बीच मनाया गया यह पर्व सीमांत क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अनूठी पहल बनकर सामने आया।
