Uttarakhand Primary Teachers Oppose TET Rule, Demand Restoration of Old Pension Scheme
- टीईटी अनिवार्यता और पुरानी पेंशन को लेकर शिक्षकों ने भरी हुंकार
- 22 जून सचिवालय कूच को जुटा शिक्षक संघ
- सरकार के खिलाफ बढ़ा आक्रोश
- प्रदेशभर के शिक्षकों से आंदोलन में शामिल होने का किया आह्वान
देहरादून@Rashtriy Vichar। उत्तराखण्ड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपे जाने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विकासखण्ड रायपुर कार्यकारिणी की बैठक में 22 जून को प्रस्तावित सचिवालय कूच को सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।
बैठक में अध्यक्ष अरविन्द सिंह सोलंकी ने कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सरकार द्वारा निर्धारित सभी योग्यताओं और परीक्षाओं को पूरा किया था। ऐसे में वर्षों तक सेवा देने के बाद अब टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के सम्मान, कार्यक्षमता और मनोबल पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और इससे शिक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त है।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने वर्ष 2017 में आरटीई एक्ट में किए गए संशोधन पर भी नाराजगी जताई और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को जोरदार ढंग से उठाया गया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और सरकार को इसे शीघ्र बहाल करना चाहिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि 22 जून को परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

शिक्षक संघ ने प्रदेशभर के शिक्षकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाने का आह्वान किया।
बैठक में कोषाध्यक्ष प्रशांत सकलानी, संरक्षक रविंद्र नाथ उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गीता लिंगवाल, संयुक्त मंत्री संजय कुमार, उपाध्यक्ष विमला रावत, फ़रसराम कोठारी, संजीता गैरोला, राजेश्वरी थपलियाल, उपमंत्री अनीता नैथानी, प्रमोद कुमार, संगठन मंत्री प्रकाश पुरोहित, आशा मोहन, ज्ञानानंद चमोली, भारती क्षेत्री प्रचार मंत्री सुनीता रावत, अंजलि सेठी, कांति रावत, गीता गौड़, लेखाकार रीता परमार उपस्थित रहे।
अधिकार और भविष्य की सुरक्षा को लड़ें शिक्षक
संघ के अध्यक्ष अरविन्द सिंह सोलंकी एवं मंत्री बिनोद सिंह असवाल ने रायपुर विकासखण्ड के सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से 22 जून को आयोजित सचिवालय कूच में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल टीईटी अनिवार्यता और पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई है।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शिक्षक वर्ग अब भी एकजुट नहीं हुआ तो भविष्य में समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए सभी शिक्षकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक मंच पर आकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में सचिवालय कूच में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांगों को मजबूती से पहुंचाएं और शिक्षक एकता का परिचय दें।
आरटीई एक्ट में संशोधन अन्यायपूर्ण
मंत्री बिनोद सिंह असवाल ने कहा कि वर्ष 2017 में आरटीई एक्ट में संशोधन कर शिक्षकों की निर्धारित अर्हता को पूर्व प्रभाव से लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सरकार द्वारा तय सभी मानकों और परीक्षाओं को पूरा कर सेवा प्राप्त की, उन्हें अब टीईटी जैसी परीक्षा के लिए बाध्य करना उनके सम्मान और कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय शिक्षकों के हितों के विपरीत है और इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को कर्मचारियों का वैधानिक और नैतिक अधिकार बताते हुए इसे जल्द बहाल करने की मांग उठाई।
