Operation Monsoon-2026 Launched at Corbett Tiger Reserve to Strengthen Wildlife Protection
- मानसून में वन्यजीवों की सुरक्षा पर फोकस
- ढिकाला पहुंचे मंत्री सुबोध उनियाल, बाघ-हाथियों का किया दीदार
नीरज सती@रामनगर#Rashtriy Vichar#Cobet#। उत्तराखंड का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व विश्व भर में अपनी जैव विविधता और बाघों के लिए प्रसिद्ध है। मानसून के आगमन के साथ ही कॉर्बेट प्रशासन ने ‘ऑपरेशन मानसून-2026’ शुरू कर दिया है। यह सीजन वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पार्क प्रशासन अलर्ट मोड में आ जाता है। मंगलवार को सूबे के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने कार्बेट टाइगर रिजर्व की ढिकाला रेंज में आगामी मानसून सत्र को देखते हुए ‘ऑपरेशन मानसून-2026’ का शुभारम्भ किया। इस दौरान वन मंत्री ने वन्यजीव सुरक्षा और वन संरक्षण को लेकर सरकार की गंभीरता का स्पष्ट संदेश दिया। इस मौके पर पार्क प्रशासन ने जंगलों की सुरक्षा के लिए हाईटेक निगरानी व्यवस्था और विशेष रणनीति का भी खाका प्रस्तुत किया गया।

मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध जैव-विविधता और वन सम्पदा राज्य की अमूल्य धरोहर है, जिसकी रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान लगातार बारिश, उफनती नदियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में वन विभाग को अतिरिक्त सतर्कता और सक्रियता के साथ काम करना होता है। मंत्री सुबोध उनियाल ने वन कर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि कार्बेट की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत बनाने के लिए सरकार हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया। ढिकाला भ्रमण के दौरान उन्होंने बाघ, हाथी और चीतलों के झुंड भी देखे, जिसने कार्यक्रम को और रोमांचक बना दिया।
इस मौके पार्क निदेशक डॉ. साकेत बड़ोला ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हांकन कर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा और शिकारियों पर नजर रखने के लिए ई-सर्विलांस टावर, 100 से अधिक एंटी-पोचिंग चौकियां, वॉच टावर, कैमरा ट्रैप्स, ड्रोन, जीपीएस मॉनिटरिंग, एटीवी वाहन और मोटर बोट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा विशेष गश्त, रात्रि एम्बुश और त्वरित प्रतिक्रिया दलों को भी सक्रिय कर दिया गया है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके। कार्यक्रम में राहुल मिश्रा, बिन्दर पाल सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
क्या होता है ऑपरेशन मानसून?
मानसून का समय वन्यजीवों और वन संपदा के लिए बहुत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान ‘ऑपरेशन मानसून’ के तहत पार्क प्रशासन द्वारा निम्न कदम उठाए जाते हैं-
- सख्त गश्त और निगरानी: लगातार बारिश, उफनते नदी-नालों और दुर्गम परिस्थितियों में भी वन कर्मियों द्वारा 24 घंटे गश्त की जाती है।
- अवैध शिकार पर रोक: बारिश के मौसम में अक्सर शिकारियों और तस्करों की सक्रियता बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए वन विभाग हाई अलर्ट पर रहता है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चौकसी बरती जाती है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम: भारी बारिश के दौरान कई जानवर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में त्वरित प्रतिक्रिया दलों (Quick Response Teams) को सक्रिय रखा जाता है ताकि आपातकालीन रेस्क्यू किया जा सके।
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग: दुर्गम इलाकों में सुरक्षा के लिए गश्त के साथ-साथ तकनीकी उपकरणों की भी मदद ली जाती है।
