- गैरसैंण में गरजी विपक्ष की आवाज
- कैग रिपोर्ट का हवाला देकर सरकार के दावों पर उठाए सवाल
- हरिद्वार का जिक्र न होने पर भी हंगामा
गैरसैंण@रा.वि.। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के समय विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए अभिभाषण को पूरी तरह खारिज कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने इसे सरकार की उपलब्धियों का बखान करने वाला दस्तावेज़ बताते हुए कहा कि इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं और जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। विपक्ष ने अभिभाषण में संशोधन के लिए कई सुझाव भी पेश किए।
बुधवार को भोजनावकाश के बाद सदन में अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि यह दस्तावेज़ केवल सरकार की पीठ थपथपाने का माध्यम है। इसमें प्रदेश की जमीनी हकीकत का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी, युवाओं का पलायन और पहाड़ों से खाली होते गांव जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस कार्ययोजना पेश नहीं की है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सरकार की चुप्पी उसकी विफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है, लेकिन अभिभाषण में इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान दिखाई नहीं देता। इसी कारण विपक्ष इस अभिभाषण को पूरी तरह खारिज करता है।
कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार का जाल फैल चुका है। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि विकासनगर के भाजपा नेता भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण को “झूठ का पुलिंदा” करार दिया।
वहीं विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि हाल ही में आई कैग रिपोर्ट ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट ने राज्यपाल के अभिभाषण और सरकार के बजट की हवा निकाल दी है। उन्होंने गंगा में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने में सरकार की विफलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर गंगा को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी है, यदि उसी की लैब गैर-मान्यता प्राप्त हो तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि अभिभाषण में पूर्व सैनिकों और राज्य आंदोलनकारियों की अनदेखी की गई है। उन्होंने इसे उनके साथ छल करार दिया।
बसपा विधायक मोहम्मद शाहजाद ने सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर बताते हुए कहा कि सरकार केवल दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने सरकार पर समाज में घृणा फैलाने का आरोप लगाया।
सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हरीश धामी, गोपाल सिंह राणा, विक्रम नेगी, रवि बहादुर, वीरेंद्र जाटव, अनुपमा रावत, ममता राकेश समेत कई विधायकों ने अभिभाषण का विरोध करते हुए इसमें संशोधन की मांग उठाई।
हरिद्वार का जिक्र न होने पर उठे सवाल
चर्चा के दौरान विधायक काजी निजामुद्दीन, अनुपमा रावत, रवि बहादुर और बसपा विधायक मोहम्मद शाहजाद ने अभिभाषण में हरिद्वार का जिक्र न होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार दिव्य और भव्य कुंभ आयोजित करने की बात कर रही है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में हरिद्वार का नाम तक नहीं लिया गया। इससे सरकार की तैयारियों और गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि सरकार को केवल दावे करने के बजाय जमीनी मुद्दों पर काम करना चाहिए और प्रदेश की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
