- खूंखार जानवरों के डर से पढ़ाई से दूर बच्चे
- वन गुर्जरों ने सरकार से लगाई बुनियादी सुविधाओं की गुहार
वाचस्पति रयाल @ नरेंद्रनगर,रा. वि.।
वन प्रभाग नरेंद्रनगर के शिवपुरी रेंज स्थित वनाधिकार ग्राम पंचायत सिंबल स्रोत कुशरेला में आयोजित वन गुर्जर समाज की बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और विद्युतीकरण जैसे बुनियादी मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। बैठक में जंगलों के बीच रहने वाले वन गुर्जरों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को सामने रखते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद रफी वन गुर्जर ने की। उन्होंने कहा कि वन गुर्जर समाज पीढ़ियों से गाय-भैंस और बकरी पालन कर जंगलों में रहकर अपना जीवन यापन करता आ रहा है, लेकिन आज भी उन्हें बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सिंबल स्रोत कुशरेला वन क्षेत्र में वन गुर्जर समुदाय के 20 से अधिक परिवार निवास करते हैं, जिनके करीब 35 से 37 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। इसका मुख्य कारण जंगलों से होकर गुजरने वाला कठिन रास्ता और जंगली जानवरों का खतरा है, जिसकी वजह से बच्चों को दूर स्थित स्कूलों तक भेजना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मोहम्मद रफी वन गुर्जर ने मांग उठाई कि वन अधिकार ग्राम सभा सिंबल स्रोत कुशरेला के केंद्रीय स्थल पर प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल खोला जाए। इसके साथ ही गुर्जरों के डेरों को पेयजल पाइपलाइन और विद्युत व्यवस्था से जोड़ा जाए तथा क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की जाए, ताकि वन गुर्जर परिवारों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन गुर्जरों और अन्य वनवासी समुदायों को कई अधिकार दिए गए हैं, लेकिन इनका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि वन गुर्जर समाज को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।
बैठक के दौरान वन गुर्जर महिलाओं ने भी अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। जानू वन गुर्जर, मलिका और रोशन बेबी ने बताया कि घने जंगलों के बीच रात के अंधेरे में जंगली जानवरों की दहाड़, बारिश और तूफान के बीच बिना बिजली के रात गुजारना कितना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि नेता अगर बरसात के मौसम में एक रात उनके डेरों में बिताएं, तभी उन्हें उनकी वास्तविक परिस्थितियों का एहसास होगा।
महिलाओं ने कहा कि जंगली जानवरों के भय के बीच बच्चों को दूर स्कूल भेजना उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मोहम्मद रफी गुर्जर द्वारा उठाई गई चारों मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर सरकार इन वर्षों पुरानी मांगों को पूरा कर दे, तो वन गुर्जर समाज भी आधुनिक और विकसित भारत का हिस्सा बनने का एहसास कर सकेगा।
इस अवसर पर गनी चेची, इमामू सैन, बजीर अली, लियाकत अली, सुलेमान गुर्जर, रोशन बेबी, यामीन गुर्जर, जुहूर, हसन, बशीर, नजीरा, सफूरा, जैतून, गुलाम नवी, गुलाम रसूल, अकबर कॉल्स, सहन लोधा, गनी गुर्जर और शमशाद सहित कई लोग मौजूद रहे।
