- डेमोग्राफिक बदलाव पर सतर्क रहने की जरूरत, कम से कम तीन बच्चों की बात
- जनसंख्या नीति पर दीर्घकालिक दृष्टि जरूरी
देहरादून @ रा.वि.।
देहरादून में उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन मोहन भागवत ने जनसंख्या कानून को लेकर दीर्घकालिक और संतुलित नीति की आवश्यकता पर जोर दिया। निबुवाला में आयोजित प्रमुख जन संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जनसंख्या कानून बनाते समय आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों और संसाधनों को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य में देश की जनसंख्या कितनी होगी और उपलब्ध संसाधन कितने होंगे, इसका समग्र आकलन जरूरी है। उन्होंने हिंदू समाज के संदर्भ में कम से कम तीन बच्चों की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में डेमोग्राफिक बदलाव पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
भागवत ने कहा कि समाज में विभाजन की मानसिकता से बचना होगा और एकता बनाए रखनी होगी। उन्होंने संघ से जुड़ने और शाखाओं में आने का आह्वान करते हुए कहा कि संघ के बारे में जो दुष्प्रचार होता है, उसे प्रत्यक्ष संवाद से दूर किया जा सकता है।
उन्होंने आधुनिक तकनीक के उपयोग का समर्थन किया, लेकिन यह भी कहा कि तकनीक मनुष्य पर हावी न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए। बच्चों के साथ समय बिताने और उन्हें भारतीय संस्कृति व हिंदू धर्म के मूल्यों से परिचित कराने पर भी उन्होंने जोर दिया।
आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज की समझ विकसित होगी। संभव है कि भविष्य में संपन्न वर्ग स्वयं आरक्षण का लाभ लेने से पीछे हटे। ऐसे में नीति निर्धारण करते समय सामाजिक संतुलन और सभी पक्षों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
देहरादून में दिया गया उनका यह बयान जनसंख्या नीति, सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों पर व्यापक चर्चा को नई दिशा देता है।
