- भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और डोनाल्ड ट्रंप की नई घोषणाओं के बीच सोना तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी में शुरुआती कारोबार में लगभग 5% की तेजी दर्ज की गई। वैश्विक आर्थिक कारकों और RBI के नियामकीय कदमों ने बुलियन बाजार को प्रभावित किया है।
जनवरी 2026 में सोना लगभग ₹1,75,231 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन फरवरी की शुरुआत में इसमें करीब 17% की गिरावट आई और कुछ ही दिनों में ₹30,000 तक की कमी दर्ज की गई। हालांकि, फरवरी के मध्य तक कीमतों में स्थिरता आई और यह ₹1.53–₹1.59 लाख के दायरे में पहुंच गया।
वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुरक्षित निवेश विकल्प (सेफ हेवन) की मांग बढ़ने से सोना तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी में करीब 5% की तेजी दर्ज हुई। मुद्रास्फीति की आशंकाएं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, घटती बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिका-ईरान जैसे तनावपूर्ण हालात ने बुलियन कीमतों को प्रभावित किया।
चांदी में उतार-चढ़ाव और अधिक रहा। 1 फरवरी को ₹3.50 लाख प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर से गिरकर यह 18 फरवरी तक लगभग ₹2.55 लाख पर आ गई, फिर ₹2.70 लाख के आसपास स्थिर हुई।
भारत में RBI ने सक्रिय रुख अपनाते हुए सोना-चांदी की कीमतों को मुद्रास्फीति निगरानी में शामिल किया है। 1 अप्रैल 2026 से कड़े गोल्ड लोन नियम लागू होंगे, जिनमें बुलियन पर ऋण पर रोक, सख्त LTV नियम और गिरवी सीमा तय की गई है। RBI का स्वर्ण भंडार बढ़कर 880.3 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले सप्ताह सोना 1.5% और चांदी 3.25% बढ़ी, जो निवेशकों की नई मांग को दर्शाता है।
