- हिमाचल में 30 दिन, उत्तराखंड में साढ़े चार साल में सिर्फ 32 दिन, सरकार पर विपक्ष का हमला
देहरादून @ रा. वि.। आगामी 9 मार्च से भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आहूत होने जा रहा है। सत्र की अवधि को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने देहरादून के राजपुर रोड स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरकार पर विधानसभा सत्र को सीमित रखने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली, शिक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे अनेक ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। लेकिन सरकार लंबी अवधि का सत्र चलाने से बच रही है। बुटोला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उत्तराखंड में कुल मिलाकर मात्र 32 दिन ही विधानसभा सत्र चले हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विधानसभा सत्र 25 से 30 दिनों तक आयोजित होते हैं, जिससे जनहित के मुद्दों पर व्यापक चर्चा संभव हो पाती है। इसके विपरीत उत्तराखंड में सत्र की अवधि लगातार घटती जा रही है।
बुटोला ने कहा कि पिछली बार अनुपूरक बजट सत्र तीन दिन का प्रस्तावित था, लेकिन वह मात्र चार घंटे में समाप्त हो गया। जब सत्र चार घंटे चलेगा तो राज्य के गंभीर और ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक विमर्श कैसे होगा?” उन्होंने सवाल उठाया।
उन्होंने बताया कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मांग की है कि गैरसैंण में प्रस्तावित बजट सत्र कम से कम 21 दिनों तक चलाया जाए, ताकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच स्वस्थ बहस हो सके और जनता के सवाल सदन में प्रभावी ढंग से उठाए जा सकें।
बुटोला ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की रणनीति अपना रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विपक्ष इस बार सदन के भीतर सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए तैयार है और यदि सत्र की अवधि नहीं बढ़ाई गई तो इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी माना जाएगा।
