- बिना सुने भेजा नीचे पद पर! वरिष्ठ आईपीएस नीरू गर्ग–अरुण जोशी मामले में कोर्ट ने केंद्र को नोटिस
- केन्द्र सरकार बोली,वेतन में कटौती नहीं की गई
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से नीचे स्तर पर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह सुनवाई पुलिस महानिरीक्षक (IG) पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग (बैच 2005) और अरुण मोहन जोशी (बैच 2006) की ओर से दायर याचिकाओं पर हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों अधिकारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी और उन्हें राज्य सरकार के बराबर ही वेतन मिलता रहेगा। हालांकि, अदालत ने इस दलील से संतुष्ट न होते हुए पूरे मामले पर स्पष्ट रुख जानने के लिए केंद्र से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है।
दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के 6 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। अधिकारियों का आरोप है कि इस निर्णय से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया और उन्हें उनके वर्तमान पद से एक स्तर नीचे पद पर तैनात किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।
आदेश के अनुसार, नीरू गर्ग को भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल में उप महानिरीक्षक (DIG) और अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल में उप महानिरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है। यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 5 मार्च को जारी किया गया था, जिसके अगले ही दिन उत्तराखंड सरकार ने दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह न केवल उनके पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन है। अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के शपथ पत्र और आगे की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस विवाद को नई दिशा दे सकती है।
