- अमरजीत बोले – क्या अब सरकार तय करेगी आस्था?
देहरादून।
अमरजीत सिंह ने धामी सरकार पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार लगातार धार्मिक आधार पर विभाजनकारी प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत पहले हरिद्वार की हर की पौड़ी में प्रयोग किया गया और अब चारधाम के मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह भाजपा और आरएसएस की धर्म आधारित राजनीति का एक और उदाहरण है, जिसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य और भ्रम पैदा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णय भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
अमरजीत सिंह ने कहा कि श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालु वर्षों से अपनी यात्रा को तभी पूर्ण मानते रहे हैं, जब वे भगवान बद्रीनाथ के दर्शन भी कर लेते थे। अब इन लाखों श्रद्धालुओं की चारधाम यात्रा पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार यह कह रही है कि “आस्था” के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन गैर-हिंदू है। ऐसे में धामी सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आस्था को मापने का यह नया पैमाना क्या होगा और इसे तय करने का अधिकार किसे दिया गया है।
उत्तराखंड का निवासी होने के नाते अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए अमरजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वयं कई बार श्री बद्रीनाथ जी के दर्शन किए हैं और जागेश्वर धाम सहित अनेक प्राचीन मंदिरों में जाने का सौभाग्य प्राप्त किया है। उन्होंने सवाल किया कि अब क्या कोई राजनीतिक दल या सरकार यह तय करेगी कि उनकी आस्था क्या है? क्या सिख होने या गैर-हिंदू होने के आधार पर उन्हें हर की पौड़ी या चारधाम के दर्शन से वंचित किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि भारत की मूल भावना “वसुधैव कुटुंबकम्” रही है और किसी भी व्यक्ति को किसी धार्मिक स्थल में प्रवेश देने या रोकने का अधिकार सरकारों को नहीं है। सरकारों का काम जनहित में कार्य करना है, न कि धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत आस्थाओं में हस्तक्षेप करना।
अमरजीत सिंह ने धामी सरकार से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने और समाज को बांटने वाले ऐसे प्रयासों से बाज आने की मांग की।
