- परिवहन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर: हजारों वाहन बिना फिटनेस और परमिट के सड़कों पर
देहरादून@रा.वि.। उत्तराखंड राज्य में वाहन पंजीकरण और फिटनेस प्रबंधन को लेकर परिवहन विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। हाल ही में आई लेखापरीक्षा रिपोर्ट में कई बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि हजारों वाहन नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वाहन पोर्टल पर सक्रिय स्थिति में दर्ज 67,603 वाहन बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के संचालित पाए गए। इनमें 561 एम्बुलेंस, 34 शैक्षणिक संस्थानों की बसें और 67,008 अन्य परिवहन वाहन शामिल हैं। इसके अलावा 43,821 गैर-परिवहन वाहनों का पंजीकरण समय पर नवीनीकृत नहीं किया गया, जबकि इनका नवीनीकरण होना जरूरी था।
लेखापरीक्षा में यह भी सामने आया कि 2,362 वाहनों का अस्थायी पंजीकरण छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थायी पंजीकरण में परिवर्तित नहीं किया गया। वहीं 361 निर्माण उपकरण वाहनों का गलत वर्गीकरण कर उन्हें भारी, मध्यम या हल्के मोटर वाहनों की श्रेणी में दर्ज कर दिया गया, जिससे पंजीकरण शुल्क भी गलत तरीके से वसूला गया।
रिपोर्ट में एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है। 30 सितंबर 2015 तक पंजीकृत 12,001 परिवहन वाहनों को 2019 से 2024 के बीच बिना गति नियंत्रक (स्पीड गवर्नर) लगाए ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ है।
इसके अलावा 6,343 सक्रिय परिवहन वाहनों के परमिट समाप्त होने के बाद भी उनका नवीनीकरण नहीं किया गया, जबकि ये वाहन सड़कों पर चलते रहे। लेखापरीक्षा में यह भी पाया गया कि 20 शैक्षणिक संस्थानों की बसें संबंधित संस्थानों के नाम के बजाय निजी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत थीं, जो नियमों का उल्लंघन है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 1,110 वाहन एक से अधिक आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में पंजीकृत पाए गए। इस तरह की गड़बड़ियां परिवहन व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
इन अनियमितताओं से न केवल राजस्व का नुकसान हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अब जरूरत है कि परिवहन विभाग इन मामलों की गहन जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
