- पहाड़ से लेकर मैदान तक गूंजे ‘हमारी मांगें पूरी करो’ के नारे
देहरादून। ट्रेड यूनियनों एवं इससे जुड़े संगठनों द्वारा केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में किए गए देशव्यापी प्रदर्शन का असर उत्तराखंड में भी देखने को मिला। राज्य में पहाड़ से लेकर मैदान तक सरकार के विरोध में रैलियां निकाली गईं। देहरादून में यूनियन से जुड़ी आशा हेल्थ वर्कर्स और सीटू कामगारों ने विरोध में केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी के बीच प्रदर्शन कर रैली निकालकर सचिवालय कूच किया।
गुरूवार को उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन्स संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न यूनियनों से जुड़े हुए श्रमिक गांधी पार्क में इकटठा हुए और वहां से न्यूनतम वेतनमान 26 हजार दिए जाने, चार श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने सहित अनेक मांगों को लेकर रैली निकालकर सचिवालय कूच किया। पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकैडिंग लगाकर रोक लिया। रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखी नोंकझोंक व धक्का मुक्की हुई।
इस बीच हंगामा करने के बाद सभी वहीं पर धरने पर बैठ गए। इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों का देश भर में विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे केंद्र सरकार को वापस लेना होगा।
सीटू के महामंत्री लेखराज ने कहा है कि केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ श्रमिक यूनियनों में रोष है। एटक महामंत्री अशोक शर्मा ने कहा कि न्यूनतम वेतन 26 हजार रूपए प्रतिमाह दिया जाए। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
इस अवसर पर रैली निकालने व प्रदर्शन करने वालों में समर भंडारी, अनंत आकाश, दलजीत सिंह, बलबीर सिंह, जगदीश कुकरेती, अनिल कुमार, वीरेंद्र नेगी, विजय गुप्ता, जितेंद्र कुमार, अनिल जैन, भगवंत सिंह पायल, रविंद्र नौटियाल, राम सिंह भंडारी, इंदु नौड़ियाल,शिवा दुबे, ज्योतिका पाण्डेय, मोनिका, मनिंद्र बिष्ट, हिमांशु चौहान आदि अनेक यूनियनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पौड़ी डीएम कार्यालय में गरजे ट्रेड यूनियन से जुड़े कर्मचारी
ट्रेड यूनियन के आह्वान पर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से जुड़े विभिन्न यूनियनों ने गुरुवार को डीएम कार्यालय में धरना दिया। धरने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेविका कर्मचारी यूनियन और उत्तराखंड भोजनमाता कामगार यूनियन, जल संस्थान, जल निगम से जुड़े कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान भोजनमाताओं ने 45 व 46वें श्रम सम्मेलन में पारित प्रस्तावों की संस्तुति को तत्काल लागू कर कर्मकार घोषित करने, भविष्य निधि व बीमा का लाभ दिए जाने, मध्यान भोजन योजना के निजीकरण पर लोक लगाने की मांग की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्कूलों की तरह आंगनगाड़ी केंद्रों में ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश का जीरो जारी करने, आंगनबाड़ी के पोषण ट्रेकर ऐप में आ रही समस्या पर कार्यकर्ता की उपस्थिति न लगने की शिकायतों पर तत्काल रोक लगाने, राज्य कर्मचारी घोषित करते हुए 26 हजार प्रतिमाह न्यूनतम वेतन देने, मानदेय में बढ़ोत्तरी करने, कोर्ट के निर्णय के तहत ग्रेज्यूटी का लाभ देने, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन, भविष्य निधि और ईएसआई की सुविधा देने की मांग की। धरने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेविका कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष नीमा रावत, ब्लाक अध्यक्ष अंजना, भोजनमाता कामगार यूनियन की जिलाध्यक्ष ऐश्वर्य जुयाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे।
आंगनबाड़ी, भोजनमाता व आशा कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली
थराली। सीटू के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों, आशा वर्करों, भोजनमाताओं समेत विभिन्न कामगार संगठनों से जुड़े लोगों ने गुरुवार को भारत बंद का समर्थन करते हुए थराली देवाल तिराहे से तहसील मुख्यालय तक जोरदार रैली निकाली। रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को 17 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रेषित किया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए श्रमिक हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में सीटू ने भारत सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं को श्रमिक विरोधी बताते हुए उन्हें निरस्त कर पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही बिजली बिल संशोधन 2025 तथा स्मार्ट मीटर योजना को वापस लेने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
कामगार संगठनों ने किसानों के हित में गारंटी बिल लागू करने और बीज बिल को निरस्त करने की मांग करते हुए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने पर जोर दिया। इसके अलावा उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों और आर्थिक संकट से जूझ रहे मजदूरों के लिए न्यूनतम 7500 रुपये मासिक पेंशन लागू करने की भी मांग की गई।
रैली में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता, भोजनमाताएं और अन्य श्रमिक संगठन से जुड़े लोग शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
रामनगर में भोजन माता हुई मुखर,विरोध में सड़कों पर उतरी
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आज देशव्यापी आम हड़ताल में रामनगर क्षेत्र की भोजनमाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के नेतृत्व में भोजनमाताओं ने कार्य बहिष्कार किया और देवभूमि व्यापार मंडल कार्यालय में सभा कर शहर में जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों मैं चार नये लेबर कोड तत्काल रद्द करने की मांग की सभा को संबोधित करते हुए प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की अध्यक्ष शारदा देवी ने कहा कि ये चार लेबर कोड मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज हैं। इनमें ट्रेड यूनियन अधिकारों और हड़ताल के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर हमला किया गया है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार पर आरोप लगाया कि वह भोजनमाताओं से मात्र 3000 रुपये मासिक मानदेय पर 11 महीने काम करा रही है। यदि मानदेय नहीं बढ़ाया गया तो भोजनमाताएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगी।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला ने कहा कि ये कोड पूंजीपतियों की मांग पर लाए गए हैं। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट के जरिए ‘हायर एंड फायर’ की छूट दी गई है। सरकार सरकारी उद्यम बेच रही है और पीएम केयर्स फंड में 11000 करोड़ से अधिक जमा कर रही है, लेकिन मजदूरों की ईएसआईसी – ईपीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा छीनने की साजिश रची जा रही है। मजदूरों को एकजुट होकर विरोध करना होगा।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी ने मोदी और धामी सरकारों पर मजदूर-किसान-युवाओं के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने सांप्रदायिक राजनीति को खारिज कर एकजुट होकर सत्ता से बेदखल करने की अपील की और चार नए लेबर कोड (वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020) को तत्काल रद्द करने की मांग की।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की पूर्व अध्यक्ष शीला शर्मा ने महिला मजदूरों पर रात की पाली थोपने के प्रावधान की आलोचना की और अंकिता भंडारी मामले का हवाला देते हुए महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाया।
सभा के बाद निकले जुलूस में गीता सत्यवली, ममता देवी, विमला देवी, कमला रावत, नंदी देवी समेत बड़ी संख्या में भोजनमाताओं ने भाग लिया।
न्यूनतम वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर जिले भर में प्रदर्शन
पिथौरागढ़। ट्रेड यूनियन के आह्वान पर आज चार लेबर कोड वापस लेने समान कार्य के लिए समान वेतन देने आंगनबाड़ी भोजन माताओं को नियमित करने और न्यूनतम मानदेय 24000 दिए जाने जैसी तमाम मांगों को लेकर आज जिले भर में प्रदर्शन हुए। जिला मुख्यालय में आंगनबाड़ी और भोजन माताओं ने संयुक्त रूप से जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने विभिन मांगे उठाते हुए इन्हें अविलंब पूरा किए जाने की मांग की। उधर धारचूला में एनएचपीसी कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने श्रम कानून को लगातार कमजोर किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए चार लेबर कोड को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की।
खटीमा में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर भोजन माताओं ने नगर में निकाला जुलूस
भोजन माताओं ने राज्य कर्मचारी घोषित करने समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर नगर में जुलूस निकाला और तहसील में प्रदर्शन कर धरना दिया। भाजन माताओं ने मांगों के निराकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
गुरूवार को भोजन माताओं ने उत्तराखंड भोजनमाता कामगर यूनियन के आह्वान पर जिलाध्यक्ष रेखा राणा के नेतृत्व में अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील में प्रदर्शन किया और तहसीलदार वीरेंद्र सिंह सजवाण के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। भोजन माताओं ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में भोजनमाताओं को चतुर्थ श्रेणी का दर्जा देकर राज्य कर्मचारी घोषित करने, मानदेय 26 हजार रूपये करने, भविष्य निधि एवं ईएसआई की सुविधा देने, 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने, निकाली गई भोजनमाताओं को वापस कार्य पर रखने, भोजनमाताओं के कल्याण के लिए कोष बनाने, मध्याह्न भोजन योजना को एनजीओ निजी हाथों में न देने, सालाना बोनस पांच हजार रूपये करने समेत विभिन्न मांगों का निराकरण करने की मांग की। इस दौरान सुधा राय, मंजीता हालदार, पारूल दास, रमिता, शिखा, देवकी देवी, माधवी, चंद्रकला, अनिता राय, काजल देवी आदि मौजूद थे।
हरिद्वार में न्यूनतम वेतन व स्थायी रोजगार की मांग को लेकर निकाला जुलूस, नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा
हरिद्वार में सीटू से जुड़े लोगों ने केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सैकड़ों मेहनतकश वर्ग और किसानों ने भाग लिया।
भेल रानीपुर, हरिद्वार में सीटू के बैनर तले भेल कामगार यूनियन और सीटू जिला कमेटी ने अभियान चलाया। वेस्टर्न गेट चौराहे पर झंडे-बैनर के साथ कामगारों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की गई। गगनभेदी नारे पूरे परिसर में गूंजे।
सीटू जिला अध्यक्ष कॉमरेड पीडी बलोनी ने भेल के 5 प्रतिशत शेयर बेचने का फैसला वापस, पुराना मनरेगा कानून बहाल, 26 हजार मासिक न्यूनतम वेतन लागू, भेल में स्थायी भर्तियां शुरू, कांट्रैक्ट लेबर को रेगुलर, बिजली बिल विधेयक 2025 वापस और बीज बिल निरस्त करने की मांग है।
शाम पांच बजे देवपुरा चौक पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला और नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में श्रम सुधारों, निजीकरण, न्यूनतम वेतन, मनरेगा, स्थायी रोजगार और अन्य मांगों पर जोर दिया गया।
इस दौरान कॉमरेड एमपी जखमोला, इमारत सिंह, अशोक चौधरी, वीरेंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार, राजकुमार, राजीव गर्ग, देवेंद्र कुमार, मनोज, मयंक शर्मा, राजेश शर्मा, राजू, विकास सैनी, मिथुन, संदीप कुमार, किशनपाल, नरेंद्र, गौरव सैनी, अंकित, राहुल रावत, मनीष कुमार, इमरान अली सफदर आजमी जाफरी आदि शामिल थे।
