Saton-Athon Gaura festival was celebrated with devotion in Dharchula, featuring traditional rituals, Jhoda-Chanchari, folk songs and vibrant Kumaoni culture.
- हाट देहात से गलाती तक बिखरी लोकसंस्कृति की छटा
- पूजा-अर्चना में उमड़े ग्रामीण
नदीम परवेज@ धारचूला। सीमांत क्षेत्र धारचूला के हाट देहात गांव में सातों-आठों गौरा पर्व आस्था, भक्ति और कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति के रंगों के साथ धूमधाम से मनाया गया। पर्व के अवसर पर गांव में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक लोकगीत और झोड़ा-चांचरी की धूम रही। महिलाओं और ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्सव में भाग लेकर पर्व की रौनक बढ़ाई।

महामंडलेश्वर ने दिया आर्शीवाद: महामंडलेश्वर वीरेंद्र महाराज ने गौरा-महेश्वर की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने देवी को फल अर्पित किए और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों के साथ गौरा पर्व की पारंपरिक उछाल रस्म में भागीदारी की।
लोक संस्कृति में रंगे ग्रामीण: भाजपा नेता प्रदीप रावत ने भी हाट देहात पहुंचकर गौरा-महेश्वर की पूजा की और क्षेत्रवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ग्रामीणों के साथ झोड़ा-चांचरी में शामिल होकर लोक संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।
समाजिक एकता दिखा सुंदर नजारा: वहीं युवा भाजपा नेता राजेंद्र नेगी ने गलाती क्षेत्र में आयोजित गौरा पर्व में हिस्सा लिया। उन्होंने पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे पारंपरिक पर्व हमारी लोक संस्कृति और सामाजिक एकता की मजबूत पहचान हैं।

पर्व के दौरान गांवों में महिलाओं और ग्रामीणों ने लोकगीतों, झोड़ा-चांचरी और पारंपरिक रस्मों में उत्साह से भाग लिया। पूरे सीमांत क्षेत्र में दिनभर आस्था, उल्लास और लोकसंस्कृति का मनमोहक संगम देखने को मिला।
