Women in Rudraprayag are making temple souvenirs and traditional products, boosting income while promoting Badri-Kedar’s cultural and religious heritage.
- मंदिरों के मॉडल बनाकर कमा रहीं लाखों
दिलवर सिंह बिष्ट @Rashtriya Vichar#Rudraprayag#UK। अगस्त्यमुनि विकासखंड की महिलाएं पहाड़ी संस्कृति और धार्मिक आस्था को रोजगार का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के तहत ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बद्रीनाथ, केदारनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों के आकर्षक स्मृति चिह्न तैयार कर रही हैं।
श्रद्धालुओं को खूब भा रही पहाड़ी संस्कृति मॉडल: पहाड़ी शैली में बनाए गए मंदिरों और भवनों के मॉडल पर्यटकों और श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रहे हैं। इनकी बिक्री सरस केंद्रों, स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। समूह से जुड़ी युवती दिव्या पढ़ाई के साथ धूपबत्ती, अगरबत्ती और स्मृति चिह्न तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें घर के साथ रोजगार का अवसर भी मिला है।
प्रशिक्षण से साथ मिल रही आर्थिक मदद: खंड विकास अधिकारी सुरेश शाह ने बताया कि परियोजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ आर्थिक मदद भी दी जा रही है। समूह से छह-सात महिलाएं जुड़ी हैं। समूह ने वर्ष 2024-25 में 2.54 लाख रुपये, 2025-26 में 3.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 7 लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है और 2.75 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया गया है।
संस्कृति से स्वरोजगार तक: महिलाएं स्थानीय संस्कृति और धार्मिक विरासत को आकर्षक उत्पादों का रूप देकर न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि बद्री-केदार की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को स्मृति चिह्नों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने का काम भी कर रही हैं।
