HIMS Jollygrant Concludes Asthma Awareness Week with Free Screening Camps for Children’s
- हर सांस की सुरक्षा का संदेश देकर संपन्न हुआ अस्थमा जागरूकता सप्ताह
- हिम्स के बाल रोग विभाग ने लगाए निःशुल्क जांच शिविर, बच्चों और अभिभावकों को दी अस्थमा से बचाव की जानकारी
- धूल-धुएं से बच्चों की सांसें खतरे में! हिम्स ने बताया अस्थमा से बचाव का सही तरीका
- स्पाइरोमेट्री टेस्ट से लेकर जागरूकता अभियान तक, हिम्स ने बच्चों की सेहत के लिए चलाई विशेष मुहिम
डोईवाला@Rashtriy Vichar#HIMS। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के बाल रोग विभाग द्वारा ‘एवरी ब्रीथ काउंट्स, कंट्रोल अस्थमा, प्रिवेंट अटैक्स’ थीम पर आयोजित सप्ताहभर चलने वाला अस्थमा जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस विशेष अभियान का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को अस्थमा के शुरुआती लक्षणों, बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना था।

अभियान के तहत अस्पताल परिसर सहित आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क अस्थमा जांच शिविर, स्पाइरोमेट्री परीक्षण, जागरूकता सत्र, पोस्टर प्रतियोगिता और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अस्थमा जैसी गंभीर श्वसन बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बाल रोग विभाग की ओपीडी में अस्थमा से संबंधित लक्षणों वाले बच्चों के लिए विशेष निःशुल्क जांच शिविर लगाया गया, जिसमें बच्चों का स्पाइरोमेट्री परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बताया कि बच्चों में लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न और रात में सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण अस्थमा के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चिकित्सकों ने धूल, धुआं, प्रदूषण और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों से बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए नियमित दवा और इनहेलर के सही उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया।
अभियान के दौरान ऋषिकेश स्थित आरएचटीसी श्यामपुर में आयोजित स्क्रीनिंग कैंप में 76 बच्चों की निःशुल्क जांच और स्पाइरोमेट्री परीक्षण किए गए। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोईवाला में आयोजित समापन शिविर में 30 बच्चों की स्क्रीनिंग कर उन्हें अस्थमा प्रबंधन एवं बचाव संबंधी परामर्श दिया गया।
कार्यक्रम के तहत एमबीबीएस छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अस्थमा जागरूकता से जुड़े संदेशों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में अरिका रैना ने प्रथम, देशना जैन एवं आस्था गर्ग ने द्वितीय तथा अवनी गर्ग एवं आयुष कंडाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
अभियान में डॉ. अनिल रावत, डॉ. सनोबर वसमी, डॉ. अल्पा गुप्ता, डॉ. आशीष सिमल्टी, डॉ. नीरूल पंडिता, डॉ. नितिका अग्रवाल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. ज्योति वालिया, डॉ. सोनम अग्रवाल, डॉ. मनदीप खालसा, डॉ. तल्हा रहमान, डॉ. प्रदीप एवं डॉ. मल्लिका सहित विभाग के सभी फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों में अस्थमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
