Incomplete Road Projects in Rathin, Dharchula Spark Anger; Villagers Warn of Protest
नदीम परवेज@धारचूला (पिथौरागढ़)।
सीमांत तहसील धारचूला की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत राथीं में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत अब सामने आने लगी है। सरकार द्वारा स्वीकृत तीन मोटर मार्ग अधूरे पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
सबसे पहले टीवी टॉवर–राथीं मोटर मार्ग की बात करें तो इस सड़क का निर्माण वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ था। लगभग 20 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में अब तक केवल 8 किलोमीटर निर्माण ही पूरा हो पाया है, जबकि शेष कार्य वर्षों से अधूरा है।
दूसरी ओर, तपोवन–राथीं मोटर मार्ग पर वर्ष 2024-25 में चौड़ीकरण और दामरीकरण का कार्य शुरू किया गया था। शुरुआत में काम तेजी से चला, लेकिन पिछले दो महीनों से यह पूरी तरह ठप पड़ा है।
तीसरा मार्ग, इंटर कॉलेज राथीं सड़क, भी अधूरे निर्माण की मार झेल रहा है। यहां भी काम शुरू होने के बाद बीच में ही रोक दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने किसी भी सड़क निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं डाली है। सरकार द्वारा बजट स्वीकृत होने के बावजूद काम का अधूरा रहना कई सवाल खड़े करता है।
सामाजिक कार्यकर्ता केशर सिंह धामी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य पुनः शुरू नहीं हुआ, तो गांव के लोग आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और ठेकेदारों की होगी।
राथीं गांव की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सीमांत क्षेत्रों में विकास केवल कागजों तक सीमित है? एक ओर सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। यदि समय रहते कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
