Uttarakhand Media Delegation Visits CIFA Bhubaneswar, Explores Modern Fisheries Techniques
- ब्लू इकोनॉमी में भारत की बड़ी संभावनाएं, ओडिशा मॉडल से उत्तराखंड को मिलेगी नई दिशा
देहरादून। ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित Central Institute of Freshwater Aquaculture (सीआईएफए) में बुधवार को उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने अध्ययन दौरा किया। यह दौरा Press Information Bureau (पीआईबी) देहरादून द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें 13 वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। दल का नेतृत्व पीआईबी देहरादून के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव सुन्द्रियाल ने किया।
दौरे के दौरान पत्रकारों ने आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों को करीब से देखा। वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे नियंत्रित वातावरण और गर्म पानी की मदद से अधिक मात्रा में और बेहतर गुणवत्ता की मछलियां तैयार की जा रही हैं। यही तकनीक ओडिशा को देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल करने में मदद कर रही है।
सीआईएफए के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने जानकारी दी कि यह संस्थान ताजे पानी में मछली पालन की नई तकनीकों के विकास का देश का प्रमुख केंद्र है। यहां विकसित तकनीकें कम लागत में ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में आसानी से अपनाई जा सकती हैं।
वैज्ञानिक डॉ. प्रताप चंद्र दास ने पत्रकारों को “चीतल मछली” के बारे में बताया, जो स्वाद और कीमत दोनों के लिहाज से खास मानी जाती है। इसकी कीमत करीब 1600 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है और यह ओडिशा में काफी पसंद की जाती है।
फिश न्यूट्रीशन विशेषज्ञ शिव शंकर गिरि ने बताया कि सही आहार और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से मछलियों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
इस दौरान “ब्लू इकोनॉमी” और भारत की वैश्विक मत्स्य उत्पादन क्षमता पर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आधुनिक तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो भारत मछली उत्पादन और निर्यात में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।
दौरे का एक खास पहलू उत्तराखंड और ओडिशा के मत्स्य पालन मॉडल की तुलना भी रहा। जहां ओडिशा में बड़े स्तर पर गर्म पानी आधारित मछली पालन होता है, वहीं उत्तराखंड में ठंडे पानी की महंगी मछलियों जैसे ट्राउट का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।
यह अध्ययन दौरा पत्रकारों के लिए एक उपयोगी अनुभव साबित हुआ, जिससे उन्हें आधुनिक तकनीकों और “ब्लू इकोनॉमी” की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
