- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को Meta और WhatsApp को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह भारत के करोड़ों उपयोगकर्ताओं के निजता के अधिकार से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा। अदालत WhatsApp की ‘टेक-इट-ऑर-लीव-इट’ (लेना है तो लो) गोपनीयता नीति और डेटा साझा करने के तरीके पर सवाल उठा रही थी, जो व्यवसायिक हितों के नाम पर उपभोक्ताओं पर थोपे गए हैं।
नई दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि “मौन उपभोक्ताओं” को किसी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग जारी रखने के लिए अपना व्यक्तिगत डेटा साझा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने निजी डेटा के बड़े पैमाने पर संग्रह और उपयोग की तुलना “चोरी करने के एक सभ्य तरीके” से की और टिप्पणी की कि Meta अब तक “लाखों बाइट डेटा” ले चुका होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी देश के निजता अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।
Meta और WhatsApp की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अमित सिब्बल ने दलील दी कि डेटा साझा करना उपयोगकर्ताओं की सहमति पर आधारित है और उनके पास ‘ऑप्ट-आउट’ का विकल्प मौजूद है। WhatsApp ने यह भी कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर भेजे और प्राप्त किए गए संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि किसी व्यक्ति से जुड़ा हर प्रकार का डेटा—चाहे वह निजी हो या न हो—आर्थिक मूल्य रखता है और इसे विज्ञापन जैसे उद्देश्यों के लिए भुनाया जा सकता है।
अदालत ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 की सीमाओं पर भी ध्यान दिलाया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह कानून निजता पर तो केंद्रित है, लेकिन डेटा के मूल्य और उससे होने वाले मुनाफे पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं करता। उन्होंने यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट जैसे कड़े नियमों का हवाला देते हुए भारत में भी अधिक सख्त निगरानी की आवश्यकता जताई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि आज नागरिक केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि “उत्पाद” भी बन चुके हैं, जिनका डेटा व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से केंद्र सरकार को इस मामले में पक्षकार बनाया।
यह मामला Meta और WhatsApp की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के फैसले को चुनौती दी है। NCLAT ने प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा WhatsApp की 2021 की गोपनीयता नीति को बाजार में प्रभुत्व का दुरुपयोग मानते हुए लगाए गए ₹213.14 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा था।
