- 6 फरवरी को घोषित भारत–अमेरिका अंतरिम पारस्परिक व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों में गहरी चिंता देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क में कटौती से घरेलू किसानों को नुकसान होगा, फसल कीमतें गिरेंगी और आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों का रास्ता खुल सकता है। इसी के विरोध में किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है।
नई दिल्ली। 6 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम पारस्परिक व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा की, जिसे दोनों देशों के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। संयुक्त बयान के अनुसार, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। इसके अलावा, भारत अमेरिकी कृषि निर्यात को प्रभावित करने वाली लंबे समय से चली आ रही गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत हुआ है।
हालांकि, इस घोषणा के बाद किसान संगठनों और खाद्य सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ASHA-किसान स्वराज जैसे संगठनों का कहना है कि कृषि आयात पर शुल्क घटने से घरेलू कीमतों में गिरावट आ सकती है, किसानों और बागवानी क्षेत्र को नुकसान होगा, पशु आहार और पशुपालन बाजार प्रभावित होंगे तथा आयात पर निर्भरता बढ़ेगी। संगठन ने विशेष रूप से DDGs और लाल ज्वार के आयात पर चिंता जताई है, जिससे मक्का, ज्वार और सोयाबीन उगाने वाले किसानों को नुकसान हो सकता है। सोयाबीन तेल के आयात को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है, खासकर तब जब महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन किसान संकट से जूझ रहे हैं।
किसानों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) खाद्य और चारा उत्पादों के संभावित आयात पर भी आपत्ति जताई है। वर्तमान में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 24 अधिसूचित फसलों—जैसे मक्का और सोयाबीन—से जुड़े आयातित खाद्य उत्पादों के लिए GM-मुक्त प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
इन चिंताओं के चलते किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने चेतावनी दी कि यह समझौता कॉरपोरेट्स को कृषि क्षेत्र पर हावी होने का अवसर देगा और पहले से ही घाटे में चल रहे किसानों के बाजार और अधिक कमजोर होंगे।
वहीं, समझौते के तहत अमेरिका भारत के कुछ उत्पादों पर 18% का पारस्परिक शुल्क लगाएगा और कुछ विमान एवं विमान पुर्ज़ों पर शुल्क हटाने पर सहमत हुआ है। इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, बहुमूल्य धातु, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा भी जताया है।
