4-Year-Old Girl Loses Leg in Road Construction Accident in Dharchula
न्याय कब मिलेगा?: पार्वती की चीखों के बीच सिस्टम खामोश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
नदीम परवेज@ धारचूला,राष्ट्रीय विचार । विकास की राह पर बन रही सड़क ने एक मासूम की जिंदगी को ऐसी चोट दी, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो पाएगी। धारचूला के जुम्मा गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य की लापरवाही ने 4 वर्षीय बच्ची पार्वती धामी से उसका बचपन ही छीन लिया। जेसीबी से गिरे पत्थरों की चपेट में आकर मासूम का पैर कट गया—एक ऐसी त्रासदी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता की कहानी भी है। घटना के बाद जहां जिम्मेदार लोग मौके से फरार हो गए, वहीं गांव के आम लोगों ने इंसानियत का परिचय देते हुए बच्ची को अपनी गोद में उठाकर अस्पताल पहुंचाया। पहले धारचूला, फिर पिथौरागढ़ और अंततः बेहतर इलाज के लिए बरेली परिवार अपनी बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए दर-दर भटकता रहा।
गरीबी की मार झेल रहे इस परिवार के लिए यह दर्द और भी गहरा है। मजदूरी कर किसी तरह घर चलाने वाले पिता के सामने अब बेटी के इलाज और भविष्य की चिंता पहाड़ बनकर खड़ी है। एक तरफ बच्ची का अधूरा शरीर, दूसरी तरफ तंत्र की चुप्पी दोनों मिलकर इस परिवार को तोड़ रहे हैं।
घटना को कई दिन बीत चुके हैं, 23 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन अब तक न्याय की कोई ठोस किरण नजर नहीं आई। इस मामले को लेकर पूर्व छात्र संघ कोषाध्यक्ष कबीर सिंह धामी ने आवाज बुलंद करते हुए कहा है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक मासूम को न्याय नहीं मिल जाता।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते और जिम्मेदारी निभाई जाती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। अब गांव की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और बच्ची के इलाज व पुनर्वास की आजीवन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है—क्या विकास कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी यूं ही चलती रहेगी? क्या गरीब परिवारों की आवाज इसी तरह दबा दी जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल, क्या पार्वती को न्याय मिलेगा?
आज यह मासूम केवल दर्द में नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से जवाब मांग रही है।
