Former Uttarakhand CM BC Khanduri Passes Away, State Mourns Loss of Veteran Leader
- फौजी अफसर से मुख्यमंत्री तक का सफर
- निधन पर राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री समेत देशभर के नेताओं ने जताया दुख
Deharadun@ Rashtriy Vichar#। उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी ने राजपुर रोड स्थित मैक्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।
राज्य सरकार ने उनके सम्मान में अंतिम संस्कार के दिन प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया है। राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का ईमानदार और अनुशासित चेहरा बताया।
खंडूड़ी के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा कर श्रद्धांजलि देने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में रही। भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन को उत्तराखंड और देश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।
फौजी अफसर से राजनीति के शिखर तक
बीसी खंडूड़ी का जीवन अनुशासन, सादगी और संघर्ष की मिसाल माना जाता है। सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उनकी पहचान साफ छवि और मजबूत प्रशासनिक निर्णयों वाले नेता के रूप में बनी।
गढ़वाल लोकसभा सीट पर भाजपा को मजबूत आधार देने का श्रेय भी खंडूड़ी को दिया जाता है। उन्होंने उस दौर में गढ़वाल सीट पर भाजपा का कमल खिलाया, जब पहाड़ की राजनीति नए दौर से गुजर रही थी। उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता केवल भाजपा तक सीमित नहीं रही, बल्कि विपक्षी दलों में भी उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता था।
अटल के भरोसेमंद ‘जनरल’
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी नेताओं में बीसी खंडूड़ी का नाम प्रमुखता से लिया जाता था। पार्टी संगठन और संसदीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ के चलते वर्ष 1999 में उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक बनाया गया था।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वर्ष 1994 में लोकसभा में उत्तराखंड के मुद्दे को लेकर हुए वॉकआउट में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुख माना जाता है।
सुशासन और सख्त फैसलों के लिए रहे चर्चित
मुख्यमंत्री रहते हुए बीसी खंडूड़ी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उनके कार्यकाल में लाया गया लोकायुक्त कानून देश के सबसे मजबूत कानूनों में गिना गया, जिसमें मुख्यमंत्री तक को जांच के दायरे में रखा गया था। यही वजह रही कि उन्हें सुशासन और पारदर्शिता की राजनीति का प्रतीक माना गया।
उनके निधन के बाद उत्तराखंड की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। प्रदेशभर में उनके समर्थक, सामाजिक संगठन और राजनीतिक कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
