- पूर्व सेनाध्यक्ष की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंश सदन को बताने को लेकर हुआ था हंगामा
नई दिल्ली। गुरूवार को लोकसभा में एक असाधारण घटनाक्रम सामने आया ,जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित कर दिया गया। वर्ष 2004 के बाद यह पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सदन को संबोधित नहीं किया।
सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिए जाने के आरोप को लेकर लगातार गतिरोध बना रहा। विपक्ष के बार-बार विरोध और हंगामे के कारण स्पीकर को सदन की कार्यवाही बार स्थगित करनी पड़ी। दरअसल राहुल गांधी सदन में पूर्व सेना अध्यक्ष के अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंश को पीठ के समक्ष रखना चाह रहे थे। जिस पर स्पीकर ने उन्हें अनुमति नही दी, जिसको लेकर सदन में गहमागहमी का माहौल बना रहा। विपक्ष ने भारी शोर सराबे के बीच सदन में कागज के टुकड़े भी पीठ की ओर उछाले। इसको लेकर स्पीकर को सदन की कार्यवाही को रोक दिया था। सरकार का कहना है कि भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े अप्रकाशित दस्तावेजों का उल्लेख करने पर संसदीय नियमों के तहत आपत्ति जताई गई।
कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के उदाहरणों का हवाला दिया, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर जानबूझकर कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम ने बजट सत्र के दौरान बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण और संसद के सुचारु संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
