- संसद में लगातार हो रहे हंगामे और व्यवधानों के बीच कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन के संचालन में पक्षपात हो रहा है और उन्हें निष्पक्ष तरीके से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा।
नई दिल्ली: कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा है। कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश और सचेतक जावेद अहमद ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को यह नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंपा। यह कदम संसद के बजट सत्र के दौरान बार-बार हो रहे हंगामे और स्थगन के बीच उठाया गया। इसी दिन लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्षी दलों का कहना है कि उन्हें बहस का समय नहीं दिया जा रहा, नोटिसों को चुनिंदा तरीके से स्वीकार किया जा रहा है और विपक्षी सांसदों को बार-बार निलंबित किया जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि इन परिस्थितियों में उनके पास इस प्रस्ताव के अलावा “कोई और विकल्प नहीं” बचा था। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष का ‘महाभियोग’ नहीं होता, बल्कि सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव के जरिए उन्हें पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया अध्यक्ष के पद की निष्पक्षता और गरिमा को ध्यान में रखकर तय की गई है।
इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार देख रहे हैं। यह प्रस्ताव विपक्षी सांसदों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 217 और 124 के तहत लाया गया है। इसके लिए लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, समाजवादी पार्टी, राजद, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और आरएसपी सहित कई विपक्षी दलों का समर्थन है। यह किसी मौजूदा लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया चौथा ऐसा प्रस्ताव है।
