Dharchula Border Market Faces Crisis as Nepal Restrictions Hit Local Trade
- सीमा पार कारोबार ठप, सीमा शुल्क के नाम पर हो रही कार्रवाई
- आक्रोशित व्यापारियों ने नेपाली मजदूरों को रोकने की चेतावनी दी
- प्रशासन नही कर रहा ठोस पहल
नदीम परवेज@धारचूला।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित धारचूला का सीमांत बाजार इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। नेपाल की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगातार लगाई जा रही पाबंदियों का सीधा असर स्थानीय व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा है। पहले सब्जियों के आयात पर रोक के बाद अब दूध, दही, पनीर, कपड़ा, मिश्री और गुड़ जैसे सामानों पर भी प्रतिबंध से बाजार की रौनक खत्म होती जा रही है।
नेपाली नागरिकों ने बनाई दूरी: कभी नेपाली ग्राहकों से गुलजार रहने वाला धारचूला का नेपाल रोड बाजार अब दिनभर सूना नजर आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि नेपाली नागरिकों ने भारतीय बाजार से दूरी बना ली है, जिससे उनकी बिक्री में भारी गिरावट आई है।
व्यापार में आई 70 फीसद की गिरावट: स्थानीय व्यापारी खुशाल सिंह धामी ने बताया कि पहले जहां प्रतिदिन 5 से 10 हजार रुपये तक की बिक्री होती थी, वहीं अब यह घटकर 1500 से 2000 रुपये तक रह गई है। सब्जी के थोक व्यापारी मोहम्मद अकरम ने बताया कि व्यापार लगभग आधा रह गया है और पूरा कारोबार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर था।
सीमा शुल्क बनी वजह: व्यापारियों का आरोप है कि नेपाल में भारतीय सामान ले जाने पर भंसार (सीमा शुल्क) के नाम पर कार्रवाई की जा रही है। कई बार सामान जब्त कर लिया जाता है या अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है। इससे नेपाली उपभोक्ता भारतीय बाजार आने से बच रहे हैं।
नहीं हुई ठोस पहल: व्यापार संघ ने पूर्व में भी प्रशासन को ज्ञापन देकर समस्या के समाधान की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो सीमांत क्षेत्र में आजीविका का संकट और गहरा जाएगा।
पनप रही बदले की भावना: अब व्यापारी नेपाल से रोजगार के लिए भारत आने वाले मजदूरों को भी रोकने की बात कह रहे हैं। इसे लेकर सीमांत बाजार के व्यापारियों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। व्यापारी योगेश गरबियाल, अरुण गरबियाल, अकरम अहमद, नईम परवेज, रजा खां, कुन्दन सिंह, ललित सिंह, हरीश जोशी, जीशान सहित अन्य व्यापारियों ने समस्या के समाधान की मांग उठाई है।
