MSW Professionals in Uttarakhand Oppose Outsourcing, Demand Regular Recruitment in Medical Colleges
- आउटसोर्सिंग के खिलाफ MSW पेशेवरों ने फूंका बिगुल, स्थायी भर्ती की मांग तेज
देहरादून@Rashtriya vichar।
राजधानी के गांधी पार्क में ‘उत्तराखंड समाजकार्य परिषद’ के गठन के साथ ही प्रदेश के MSW (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) प्रशिक्षित युवाओं ने स्थायी रोजगार के मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने सरकार की उस नीति पर तीखा प्रहार किया है, जिसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार और पिथौरागढ़ में चिकित्सा समाज कल्याण अधिकारी (MSWO) जैसे संवेदनशील पदों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरा जा रहा है।
परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसे गंभीर क्षेत्र में आउटसोर्सिंग न केवल पेशेवरों के साथ अन्याय है, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालता है। उन्होंने मांग की कि इन पदों पर तुरंत नियमित भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए।
परिषद की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग की व्यवस्था को खत्म कर सभी सृजित पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से भरना, प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में MSWO पदों का सृजन करना, तथा केवल प्रशिक्षित MSW डिग्रीधारकों को ही नियुक्ति में प्राथमिकता देना शामिल है।
बैठक में नई कार्यकारिणी का भी गठन किया गया, जिसमें बृजपाल रावत को प्रदेश अध्यक्ष, डॉ. रंजीता जुयाल को कोषाध्यक्ष और रमेश गड़िया, अंकुर रावत एवं अतुल सती को प्रदेश महामंत्री बनाया गया। इसके अलावा उपाध्यक्ष, सचिव और अन्य पदों पर भी कई नियुक्तियां की गईं, जिससे संगठन को मजबूत आधार मिला।
नवनियुक्त अध्यक्ष बृजपाल रावत ने सरकार को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो परिषद पूरे उत्तराखंड में जिला स्तर पर इकाइयां बनाकर व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।
संरक्षक मंडल में डॉ. जय प्रकाश भट्ट, राकेश डोबाल, मनवीर माही और डॉ. नितिन बिष्ट जैसे वरिष्ठ नाम शामिल किए गए हैं, जो संगठन को दिशा देने का काम करेंगे।
बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों को बधाई देते हुए यह संकल्प लिया गया कि समाजकार्य परिषद युवाओं के रोजगार, सम्मान और पेशेवर अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
