Public Protest Wins: Liquor Shop Cancelled at Sacred Tawaghat Sangam
नदीम परवेज@ धारचूला (पिथौरागढ़) ।
तवाघाट के पवित्र संगम को बचाने की लड़ाई में आखिरकार जनता की जीत हुई। अनशनकारियों के अडिग सत्याग्रह और क्षेत्रवासियों के व्यापक समर्थन के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा और प्रस्तावित अंग्रेजी शराब की दुकान को स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया।

तहसीलदार दमन शेखर राना ने जानकारी देते हुए बताया कि शराब ठेकेदार ने स्वयं जिला अधिकारी पिथौरागढ़ को पत्र लिखकर तवाघाट में दुकान खोलने से इंकार कर दिया है। इसके बाद तहसीलदार धारचूला और थाना प्रभारी हरेंद्र नेगी ने तवाघाट संगम स्थल पर पहुंचकर संयुक्त रूप से आधिकारिक घोषणा की कि अब यहां शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी।
यह संघर्ष केवल एक दुकान के विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि आस्था, संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा का आंदोलन बन गया था। आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। माताओं ने घर की जिम्मेदारियां छोड़कर आंदोलन का नेतृत्व किया, युवाओं ने अपनी पढ़ाई के बीच समय निकालकर मोर्चा संभाला, जबकि बुजुर्गों ने उपवास को अपना हथियार बनाया। लगातार जनदबाव और शांतिपूर्ण विरोध के चलते प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लेना पड़ा।
यह ऐतिहासिक जीत इस बात का प्रमाण है कि जब जनता एकजुट होकर अपनी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के लिए खड़ी होती है, तो बड़े से बड़ा निर्णय भी बदला जा सकता है। आंदोलन से जुड़े महेश वर्मा ने सभी क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे जनता की जीत बताया।
