- भारत सरकार ने ड्राफ्ट आयकर नियम, 2026 के तहत पैन प्रणाली को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े सुधार प्रस्तावित किए हैं।
- आधार से अनिवार्य लिंकिंग से लेकर लेन-देन की नई सीमा और क्यूआर कोड वाले पैन कार्ड तक, ये बदलाव वेतनभोगी कर्मचारियों, व्यापारियों और निवेशकों सभी को प्रभावित करेंगे।
- हितधारकों से 22 फरवरी 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं और अंतिम नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है।
भारत सरकार ने ड्राफ्ट आयकर नियम, 2026 के माध्यम से पैन कार्ड से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इनका उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना, टैक्स धोखाधड़ी रोकना और नागरिकों के लिए वित्तीय प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। सुझाव मिलने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव आधार से पैन की अनिवार्य लिंकिंग है। यदि पैन आधार से लिंक नहीं है, तो वह निष्क्रिय हो सकता है। इससे आयकर रिटर्न भरने, बैंक खाता खोलने और बड़े लेन-देन करने में समस्या आ सकती है। इस कदम का मकसद फर्जी पैन कार्ड रोकना और केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाना है।
सरकार डिजिटल पैन यानी ई-पैन को भी बढ़ावा दे रही है। ई-पैन पूरी तरह वैध है और इसे मोबाइल या ईमेल में सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे पैन खोने का डर खत्म होता है और सत्यापन तुरंत हो जाता है। नए पैन कार्ड में क्यूआर कोड भी होगा, जिससे बैंक, नियोक्ता और टैक्स अधिकारी तुरंत जानकारी सत्यापित कर सकेंगे।
एक अन्य बड़ा बदलाव पैन को एकल वित्तीय पहचान के रूप में विकसित करना है। बैंक खाते, निवेश, ऋण, क्रेडिट इतिहास और टैक्स रिटर्न सभी एक ही पैन से जुड़े होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान होगी।
ड्राफ्ट नियमों में लेन-देन की सीमा में भी बदलाव प्रस्तावित है। नकद जमा और निकासी की सीमा 10 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य के वाहन (दो-पहिया सहित) खरीदने पर पैन अनिवार्य होगा। होटल और रेस्टोरेंट बिल की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जा सकती है। अचल संपत्ति लेन-देन की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। बीमा कंपनियों के साथ सभी खाता-आधारित संबंधों में भी पैन अनिवार्य होगा।
इन सुधारों का उद्देश्य भारत में अधिक डिजिटल, सुरक्षित और पारदर्शी कर व्यवस्था स्थापित करना है।
