Orphan Siblings in Rudraprayag Struggle for Survival, Appeal for Government Support
- सहारे की तलाश में अनाथ भाई-बहन, प्रशासन से मदद की गुहार
दिलबर सिंह बिष्ट@ रुद्रप्रयाग। जब किसी बच्चे के सिर से माता-पिता का साया उठ जाता है, तो उसकी पूरी दुनिया जैसे एक पल में उजड़ जाती है। जहां कभी प्यार, सुरक्षा और अपनापन होता है, वहीं अब सन्नाटा, असुरक्षा और संघर्ष की लंबी राह सामने खड़ी होती है। ऐसे ही हालातों से गुजर रहे हैं जखोली विकासखंड के ग्राम पंचायत त्यूँखर के दो मासूम बच्चे, जिनकी जिंदगी अचानक बदल गई है।
15 वर्षीय सालनी और 12 वर्षीय साहिल के सिर से पहले पिता और अब मां का साया उठ चुका है। वर्ष 2017 में पिता दीपक सिंह की एक हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके बाद मां दीना देवी ने अपने बच्चों को हर मुश्किल से बचाकर उनका पालन-पोषण किया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 12 फरवरी को अचानक उनकी भी मृत्यु हो गई, और दोनों बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए।
आज ये दोनों मासूम अपनी वृद्ध दादी के साथ रह रहे हैं, जिनके लिए खुद अपना जीवन चलाना भी मुश्किल है। परिवार में चाचा-ताऊ होने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, जिससे बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि साहिल मानसिक रूप से पूरी तरह स्थिति को समझ भी नहीं पा रहा और उसे अब तक यह एहसास नहीं है कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही।
गांव के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए शासन और जिला प्रशासन से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि इन बच्चों को आर्थिक सहायता, शिक्षा और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वे अपने जीवन को फिर से संवार सकें।
यह केवल दो बच्चों की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी सच्चाई है जो समाज और प्रशासन दोनों से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मांग करती है। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि इन मासूमों को समय पर सहारा मिल पाता है या नहीं।
