Nasogi Village Builds ₹37 Lakh Bal Kunwari Temple in Uttarakhand | Faith & Unity Story
- आस्था, एकता और समर्पण का चमत्कार: नसोगी गांव में 37 लाख से बना मां बाल कुंवारी का दिव्य धाम
- मां बाल कुंवारी की प्राण प्रतिष्ठा के साथ नसोगी के ग्रामीणों ने प्रदर्शित की आस्था की अनूठी मिसाल
- वैदिक मंत्रोचार व मां के जय कारों की गूंज के साथ, गर्भ गृह में स्थापित की गई मां की दिव्य मूर्ति
- ग्रामीणों में दिखा आस्था और एकता का अद्भुत जुनून
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर।
जब शक्ति की सिद्धिदात्री मां की पूजा अर्चना व अनुष्ठान जैसे दैवीय कार्य को करते हुए संपूर्ण समूह की अंतरात्मा में मां के प्रति समर्पण, भावपूर्ण स्मरण, हृदय की पवित्रता व कृतज्ञता जैसे मनोभाव हों,तो निश्चित ही बड़ा सा बड़ा दिव्य अनुष्ठान का कार्य निर्विघ्नता के साथ संपन्न हो जाता है।

गांव द्वारा समूह के रूप में किए जाने वाले ऐसे कार्य न सिर्फ गांव के लिए, बल्कि तमाम पास पड़ोस के क्षेत्र के लिए भी एक, प्रेरणादाई मिशाल बन जाती है।
ऐसी ही एक जीती-जागती मिशाल पेश की है, विकास खंड नरेंद्रनगर की पट्टी दोगी के, 35 से 40 परिवारों वाले गांव नसोगी ने।
नसोगी गांव के ग्रामीणों ने मंदिर समिति के अध्यक्ष नागेंद्र रयाल, प्रबुद्ध समाज सुधारक गुनानंद रयाल, उपा०हरि प्रसाद रयाल, कोषा०सोम दत्त रयाल, बचन देव रयाल, नवीन रयाल,अमर देव रयाल, सूर्य प्रकाश रयाल, सुंदरलाल रयाल व राम प्रसाद रयाल की अगुवाई में मां बाल कुंवारी के जीर्ण-शीर्ण मंदिर को जीर्णोद्धार करने की ठानी।

प्रबुद्ध और जाने माने समाजसेवी गुणानंद रयाल ने स्पष्ट किया कि मां बाल कुंवारी ने ढाई साल पहले नागेंद्र रयाल के सपने में आकर नए भवन पर विराजमान होने की मन इच्छा जताई।
तो फिर बस क्या था, गांव के ग्रामीणों में आस्था व एकता का ऐसा जुनून देखने को मिला, कि उन्होंने एक मत होकर मां शक्ति के लिए 37 लाख से अधिक का दिव्य भवन बनाकर ऐसी अनूठी मिसाल पेश की कि ढाई साल में नए मंदिर भवन का निर्माण कर डाला।
दक्षिण भारत से लायी गयी मां बाल कुंवारी की नव मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हेतु महायज्ञाचार्य रमेश उनियाल, आचार्य मुकुंदी राम कपूरूवान, आचार्य हेतराम कपरूवान, पंडित प्रमोद कुलियाल एवं दीक्षांत डंगवाल को विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना हेतु, मंदिर समिति द्वारा आमंत्रित किया गया।
इस अनुष्ठान महायज्ञ में गांव की ध्याणियों व पुरुषों ने प्रदेश के अन्य प्रदेशों से आकर हर्षोल्लास के साथ यज्ञ में प्रतिभाग किया। गांव और क्षेत्र के लोग मां बालकुंवारी को क्षेत्र की रक्षक, आराध्या देवी व कुल देवी के रूप में पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त श्रद्धाभाव से मां के मंदिर में मन्नतें मांगता है,उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। प्रसिद्ध यज्ञाचार्य रमेश उनियाल ने मां की मूर्ति में दिव्य चेतना जागृत करने व मूर्ति को जीवंत स्वरूप प्रदान करने हेतु, मंत्रोच्चार के साथ भव्य पूजा अर्चना आरंभ की।
उन्होंने आस्थावान भक्तों को प्राण प्रतिष्ठा का सार समझाते हुए कहा कि विधि विधान पूर्वक मंत्रोचार व अनुष्ठानों के माध्यम से मूर्ति में प्राण अर्थात दैवीय शक्ति का वास होने के बाद भक्त व देवी-देवता के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होता है। बशर्ते कि भक्त अपार श्रद्धा के साथ देवी- देवता का स्मरण कर मन्नतें मांगें। बताया कि इससे मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी मिलती है व मां की श्रद्धा भक्ति में ही शक्ति निहित है।
प्रमुख यज्ञाचार्य रमेश उनियाल के दिशा निर्देशन व पंडित प्रमोद कुलियाल के मार्गदर्शन में यजमानों द्वारा मां की दिव्य मूर्ति को कुश, घृत व शहद आदि पंचामृत से स्नान के बाद वस्त्र धारण करवा कर मां को मंदिर गर्भ गृह में विराजमान करते ही मंदिर परिसर मां के जय कारों से गूंज उठा।
समिति के मुख्य सलाहकार और क्षेत्र के जाने-माने प्रबुद्ध समाजसेवी गुणानंद रयाल ने आचार्य मंडली सहित ग्राम और क्षेत्र वासियों का, कार्य को सफल बनाने हेतु सभी का आभार व्यक्त किया।
भंडारे के रूप में मां का भोग प्रसाद लेकर श्रद्धालुओं ने अपने को धन्य माना और इसी के साथ महायज्ञ का समापन हो गया।
इस मौके पर वयोवृद्ध श्रद्धालु तारा दत्त रयाल, हल्द्वानी से आए डॉ० राकेश रयाल, मुंबई से आए परम श्रद्धालु रमेश दत्त रयाल, श्रीमती शशि रयाल, सुरेश रयाल, श्रीमती अंजू रयाल, श्रीमती जसोदा, आचार्य धीरेंद्र रयाल, चंडीगढ़ से आए दयानंद रयाल, वीरेंद्र रयाल, डॉ० भगत राम रयाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
