Narendranagar Education Department in Crisis: One Officer Handles 429 Teachers’ Work
- 6 पद, 1 अफसर और 429 शिक्षक: नरेंद्रनगर शिक्षा विभाग का सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त
- शिक्षा सुधार के दावे खोखले, फकोट ब्लॉक कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी और लंबित प्रकरण
- उपखंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार 2022 से खंड शिक्षा अधिकारी के हवाले
- राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने का ढोल पीटते शिक्षा मंत्री को आईना दिखाती फकोट कार्यालय की बदहाली
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर। बच्चों के भविष्य और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा एक मजबूत व महत्वपूर्ण कारक माना जाता है,मगर जब राष्ट्र निर्माता कहे जाने वाले शिक्षक समस्याओं के दल-दल में फंसे हों, तो ऐसे में चिंता ग्रस्त शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण में अपनी भूमिका बेहतर तरीके से कैसे निभा पायेंगे, यह बड़ा सवाल है। मामला नरेंद्र नगर विकासखंड के शिक्षा विभाग का है। विकासखंड नरेंद्र नगर का ब्लॉक मुख्यालय, नरेंद्र नगर से 17 किलोमीटर दूर फकोट में है यहां पर 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्लॉक स्तरीय कार्यालय है।
ब्लॉक कार्यालय में उप शिक्षा अधिकारी,मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक सभी में एक-एक व कनिष्ठ सहायक में दो पदों सहित कुल 6 पद सृजित हैं, मगर ताज्जुब की बात तो ये है, कि इन सभी पदों का दायित्व सिर्फ एक मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मुकुल काला निभा रहे हैं।

उपखंड शिक्षा अधिकारी का पद जून 2022 से रिक्त चला आ रहा है, प्रशासनिक अधिकारी और कनिष्ठ सहायक, नरेंद्रनगर स्थित, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच हैं, एक को नशा मुक्ति केंद्र भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य तीन महीनों से गायब है, और एक पद कनिष्ठ सहायक का लम्बे समय से रिक्त चला आ रहा है, इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहें,कि ब्लॉक में कार्यरत 429 शिक्षक-शिक्षिकाओं के कार्यों के लिए सृजित 6 कर्मचारियों के कार्यों को,अकेला मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ही निभाता आ रहा है, कार्यालय का गेट से लेकर दरवाजा खोलना, बंद करना सब कुछ मुकुल काला के हवाले है, चतुर्थ श्रेणी की भर्ती तो सरकार ने बहुत पहले से बंद की हुई है।
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मुकुल काला का कहना है,कि ब्लॉक कार्यालय की बुरी स्थिति का पता सभी उच्च अधिकारियों को पता है,इससे अधिक वे कुछ नहीं कह सकते, कहा कि 429 शिक्षकों के प्रकरणों को, अकेला नहीं निपटाया जा सकता, इसीलिए लंबे समय से शिक्षकों के प्रकरण लंबित पड़े हुए हैं।
उपखंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार 2022 से खंड शिक्षा अधिकारी के हवाले है, मगर वे महीनो में ही यदा-कदा कार्यालय में दिखाई देते हैं। बताते चलें कि समय से शिक्षकों की कार्य न होने से इसका बुरा असर पठन-पाठन कार्य पर पड़ना स्वाभाविक है।
बहरहाल फकोट स्थित शिक्षा विभाग का कार्यालय,सरकार द्वारा शिक्षा में सुधार के ढोल की पोल खोलने को तो काफी है, देखने वाली बात ये होगी कि कार्यालय का काम कब पटरी पर लौटता है, या फिर डाक के तीन पात वाली कहावत यूं ही आगे भी चरितार्थ होती रहेगी।
